SSC GD CONSTABLE 2026 • HINDI
समास — Complete Notes
Basic से Advanced तक समास की परिभाषा, भेद, समास-विग्रह, नियम, पहचानने की Tricks, उदाहरण, परीक्षा-उपयोगी प्रश्न और Revision Notes।
📘 SSC GD 2026 परीक्षा संदर्भ
परीक्षा: SSC Constable (GD) Examination 2026
SSC की 2026 की आधिकारिक सूचनाओं के अनुसार Constable (GD) Examination 2026 आयोजित की गई है। इस Notes Chapter को 2026 भर्ती के संदर्भ में तैयार किया गया है। परीक्षा के आधिकारिक नियम/पैटर्न को SSC की संबंधित आधिकारिक सूचना से ही अंतिम मानें।
महत्वपूर्ण: हिंदी के इस Chapter के लिए नीचे दिए गए प्रश्न अभ्यास और Pattern Based Questions हैं। जिन्हें वास्तविक Previous Year Question के रूप में आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं किया गया है, उन्हें PYQ Pattern Based Important Question के रूप में ही चिह्नित किया गया है।
स्रोत संदर्भ: Staff Selection Commission की Constable (GD) Examination 2026 संबंधी आधिकारिक सूचनाएँ।
📑 विषय-सूची
1️⃣ समास का परिचय — Introduction
समास का सामान्य अर्थ है — संक्षेप। हिंदी व्याकरण में जब दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक संक्षिप्त शब्द बनाया जाता है और उनके बीच के संबंध को संक्षेप में व्यक्त किया जाता है, तो उसे समास कहते हैं।
📌 सरल परिभाषा
दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने संक्षिप्त शब्द को समस्त पद कहते हैं और उसके विस्तृत रूप को समास-विग्रह कहते हैं।
🧠 याद रखें
समस्त पद = छोटा रूप
विग्रह = विस्तृत रूप
उदाहरण
राजा का पुत्र → राजपुत्र
यहाँ “राजा का पुत्र” विग्रह है और “राजपुत्र” समस्त पद है।
🎯 SSC GD में क्या पूछा जा सकता है?
- किस शब्द में कौन-सा समास है?
- समस्त पद का सही विग्रह क्या है?
- दिए गए विग्रह से समस्त पद चुनना।
- किस समास में कौन-सा संबंध/प्रधानता होती है?
- तत्पुरुष के उपभेद की पहचान।
- कर्मधारय, द्विगु और बहुव्रीहि में अंतर।
2️⃣ Complete Basic Concepts
समास में मुख्य रूप से क्या समझना है?
- समस्त पद पहचानना।
- समस्त पद का विग्रह करना।
- विग्रह में छिपे संबंध को पहचानना।
- पूर्वपद और उत्तरपद की भूमिका समझना।
- इसी आधार पर समास का भेद निर्धारित करना।
पूर्वपद
समस्त पद में सामान्यतः पहले आने वाला पद पूर्वपद कहलाता है।
राजपुत्र में “राज” पूर्वपद है।
उत्तरपद
समस्त पद में बाद में आने वाला पद उत्तरपद कहलाता है।
राजपुत्र में “पुत्र” उत्तरपद है।
✍️ नोटबुक Trick
पहले शब्द + दूसरे शब्द → एक छोटा शब्द
राजा का पुत्र → राज + पुत्र → राजपुत्र
माता और पिता → माता + पिता → माता-पिता
नीला कमल → नील + कमल → नीलकमल
⚠️ महत्वपूर्ण
हर दो शब्दों का केवल पास-पास आ जाना समास नहीं माना जाता। परीक्षा में विग्रह और शब्दों के बीच संबंध देखकर उत्तर निकालना अधिक सुरक्षित है।
3️⃣ Important Definitions
समास
दो या दो से अधिक पदों को संक्षिप्त करके एक पद बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं।
समस्त पद
समास के बाद बनने वाला संक्षिप्त शब्द समस्त पद कहलाता है।
समास-विग्रह
समस्त पद को उसके मूल विस्तृत रूप में अलग-अलग करके अर्थ स्पष्ट करना समास-विग्रह कहलाता है।
पूर्वपद
समस्त पद का पहला घटक पूर्वपद कहलाता है।
उत्तरपद
समस्त पद का दूसरा/बाद वाला घटक उत्तरपद कहलाता है।
प्रधानता
समास में किस पद या दोनों पदों का अर्थ प्रमुख है, यह समास की पहचान में महत्वपूर्ण है।
4️⃣ समास के प्रमुख भेद
प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यतः निम्न छह प्रकार विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं:
| समास | मुख्य पहचान | उदाहरण | विग्रह |
|---|---|---|---|
| अव्ययीभाव | पूर्वपद प्रधान; पहला पद प्रायः अव्यय | यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार |
| तत्पुरुष | उत्तरपद प्रधान; विभक्ति का लोप | राजपुत्र | राजा का पुत्र |
| कर्मधारय | विशेषण + विशेष्य / उपमान-उपमेय संबंध | नीलकमल | नीला कमल |
| द्विगु | पूर्वपद में संख्या का बोध | त्रिभुवन | तीन भुवनों का समूह |
| द्वंद्व | दोनों पद प्रधान; “और” का भाव | माता-पिता | माता और पिता |
| बहुव्रीहि | दोनों पदों से अलग किसी तीसरे का बोध | दशानन | दस हैं आनन जिसके |
📌 पाठ्यक्रमीय सावधानी
कुछ व्याकरण-पुस्तकों में कर्मधारय और द्विगु को तत्पुरुष के उपभेद के रूप में भी समझाया जाता है, जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में इन्हें अलग पहचान के रूप में पढ़ाया जाता है। प्रश्न में दिए गए विकल्प और अपेक्षित वर्गीकरण के अनुसार उत्तर दें।
5️⃣ तत्पुरुष के उपभेद
तत्पुरुष समास में सामान्यतः उत्तरपद प्रधान होता है और विग्रह करने पर किसी विभक्ति-चिह्न का संबंध सामने आता है।
| उपभेद | विभक्ति-संबंध | उदाहरण | विग्रह |
|---|---|---|---|
| कर्म तत्पुरुष | को | यशप्राप्त | यश को प्राप्त |
| करण तत्पुरुष | से / के द्वारा | हस्तलिखित | हाथ से लिखा हुआ |
| संप्रदान तत्पुरुष | के लिए | गुरुदक्षिणा | गुरु के लिए दक्षिणा |
| अपादान तत्पुरुष | से अलग / से रहित | ऋणमुक्त | ऋण से मुक्त |
| संबंध तत्पुरुष | का / के / की | राजपुत्र | राजा का पुत्र |
| अधिकरण तत्पुरुष | में / पर | वनवास | वन में वास |
⚡ तत्पुरुष पहचान Trick
विग्रह करते समय यदि को, से, के लिए, से अलग/रहित, का/के/की, में/पर जैसे संबंध स्पष्ट दिखाई दें और उत्तरपद मुख्य हो, तो तत्पुरुष की संभावना बहुत अधिक होती है।
6️⃣ Important Rules & Concepts
नियम 1 — “और” का भाव
यदि विग्रह में दोनों पदों के बीच “और” लगाया जा सकता है और दोनों पद समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, तो द्वंद्व समास की संभावना होती है।
माता-पिता = माता और पिता → द्वंद्व
सुख-दुःख = सुख और दुःख → द्वंद्व
नियम 2 — संख्या का बोध
यदि समस्त पद के आरंभ में संख्या है और पूरे पद से किसी समूह/समाहार का बोध होता है, तो द्विगु समास की संभावना होती है।
त्रिभुवन = तीन भुवनों का समूह → द्विगु
चौराहा = चार राहों का समूह → द्विगु
नियम 3 — तीसरे व्यक्ति/वस्तु का बोध
यदि समस्त पद के दोनों शब्द मिलकर किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु की विशेषता बताते हैं और स्वयं उन दोनों पदों का अर्थ मुख्य नहीं है, तो बहुव्रीहि समास हो सकता है।
दशानन = दस हैं आनन जिसके → रावण
लंबोदर = लंबा है उदर जिसका → गणेश
नियम 4 — विशेषण + विशेष्य
जब पहला पद दूसरे पद की विशेषता बताता है और दोनों मिलकर उसी वस्तु/व्यक्ति का बोध कराते हैं, तो कर्मधारय की पहचान की जाती है।
नीलकमल = नीला कमल → कर्मधारय
महापुरुष = महान पुरुष → कर्मधारय
नियम 5 — अव्ययीभाव
जिस समास में पूर्वपद प्रधान हो और समस्त पद का प्रयोग प्रायः अव्यय की तरह हो, वहाँ अव्ययीभाव की संभावना होती है।
यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
प्रतिदिन = प्रत्येक दिन
आजीवन = जीवन भर
⚠️ Trap Point
केवल संख्या देखकर हर शब्द को द्विगु न मानें। यह भी देखें कि पूरा समस्त पद किस अर्थ का बोध कराता है और प्रश्न की पारंपरिक व्याकरणिक वर्गीकरण-पद्धति क्या है।
7️⃣ Tricks & Shortcut Methods
🧠 Trick 1 — “और” Test
विग्रह में “और” आसानी से आए → द्वंद्व
माता-पिता → माता और पिता
🧠 Trick 2 — “का/के/की” Test
विग्रह में का/के/की आए → अक्सर संबंध तत्पुरुष
राजपुत्र → राजा का पुत्र
🧠 Trick 3 — “के लिए” Test
विग्रह में “के लिए” आए → संप्रदान तत्पुरुष
गुरुदक्षिणा → गुरु के लिए दक्षिणा
🧠 Trick 4 — “से” Test
“से / के द्वारा” का संबंध → करण तत्पुरुष
हस्तलिखित → हाथ से लिखा हुआ
🧠 Trick 5 — संख्या Test
आरंभ में संख्या + समूह का अर्थ → द्विगु
त्रिभुवन → तीन भुवनों का समूह
🧠 Trick 6 — तीसरा कौन?
दोनों शब्द मिलकर किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु की ओर संकेत करें → बहुव्रीहि
दशानन → जिसके दस आनन हैं
🔥 Super Revision Line
और = द्वंद्व | संख्या+समूह = द्विगु | विशेषण+विशेष्य = कर्मधारय | तीसरे का बोध = बहुव्रीहि | विभक्ति संबंध = तत्पुरुष | पूर्वपद प्रधान = अव्ययीभाव
8️⃣ Solved Examples — Basic to Advanced
प्रश्न 1. “माता-पिता” में कौन-सा समास है?
प्रश्न 2. “राजपुत्र” का सही विग्रह क्या है?
प्रश्न 3. “नीलकमल” में कौन-सा समास है?
प्रश्न 4. “यथाशक्ति” में कौन-सा समास है?
प्रश्न 5. “त्रिभुवन” में कौन-सा समास है?
प्रश्न 6. “दशानन” में कौन-सा समास है?
प्रश्न 7. “हस्तलिखित” में कौन-सा तत्पुरुष है?
प्रश्न 8. “ऋणमुक्त” में कौन-सा तत्पुरुष है?
प्रश्न 9. “महापुरुष” की सही पहचान क्या है?
प्रश्न 10. “वनवास” का सही विग्रह और समास बताइए।
9️⃣ PYQ Section — Verification Safe
⚠️ PYQ सत्यापन स्थिति
इस Notes में ऐसे प्रश्नों को वास्तविक SSC GD PYQ के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है जिनके वर्ष/Shift/आधिकारिक स्रोत की विश्वसनीय पुष्टि उपलब्ध नहीं है। नीचे दिए गए प्रश्न PYQ Pattern Based Important Questions हैं।
प्रश्न 1. “माता-पिता” में कौन-सा समास है?
विस्तृत समाधान देखें
प्रश्न 2. “नीलकमल” का विग्रह क्या है?
विस्तृत समाधान देखें
🔟 Practice Questions
“राजपुत्र” में कौन-सा समास है?
“सुख-दुःख” में कौन-सा समास है?
“यथाशक्ति” का सही अर्थ है—
“महापुरुष” में कौन-सा समास है?
“त्रिभुवन” का सही समास है—
“गुरुदक्षिणा” का सही विग्रह है—
“हस्तलिखित” में कौन-सा तत्पुरुष है?
“दशानन” में किस समास की पहचान होती है?
“ऋणमुक्त” का विग्रह है—
“वनवास” में कौन-सा तत्पुरुष है?
निम्न में से बहुव्रीहि समास का उदाहरण कौन-सा है?
“चौराहा” में सामान्यतः कौन-सा समास माना जाता है?
✅ Answer Key
📝 Detailed Solutions
1️⃣1️⃣ Concept-Based Questions
Concept 1
प्रश्न: द्वंद्व और तत्पुरुष में सबसे उपयोगी प्रारंभिक अंतर क्या है?
उत्तर: द्वंद्व में सामान्यतः “और” का भाव तथा दोनों पदों की प्रधानता होती है; तत्पुरुष में उत्तरपद प्रधान और किसी विभक्ति-संबंध का बोध होता है।
Concept 2
प्रश्न: कर्मधारय और बहुव्रीहि को कैसे अलग करें?
उत्तर: कर्मधारय में दोनों पद मिलकर उसी वस्तु/व्यक्ति का बोध कराते हैं; बहुव्रीहि में दोनों पद मिलकर किसी तीसरे का बोध करा सकते हैं।
Concept 3
प्रश्न: द्विगु में संख्या का होना पर्याप्त है?
उत्तर: नहीं। संख्या के साथ पूरे समस्त पद के अर्थ और समूह/समाहार के भाव को भी देखना चाहिए।
Concept 4
प्रश्न: समास-विग्रह क्यों जरूरी है?
उत्तर: केवल शब्द देखकर समास तय करने में भ्रम हो सकता है। विग्रह से संबंध और अर्थ स्पष्ट होता है।
1️⃣2️⃣ Advanced Level
कर्मधारय बनाम बहुव्रीहि
| बिंदु | कर्मधारय | बहुव्रीहि |
|---|---|---|
| अर्थ | उसी वस्तु/व्यक्ति की विशेषता | किसी तीसरे का बोध |
| उदाहरण | नीलकमल | दशानन |
| विग्रह | नीला कमल | दस हैं आनन जिसके |
द्विगु बनाम बहुव्रीहि — Trap
दोनों में संख्या दिखाई दे सकती है। इसलिए केवल संख्या देखकर उत्तर न दें। देखें कि समस्त पद से समूह का अर्थ निकल रहा है या किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का।
त्रिभुवन → तीन भुवनों का समूह → द्विगु
दशानन → जिसके दस आनन हैं → बहुव्रीहि
तत्पुरुष में विभक्ति पहचान
| संबंध | सहायक शब्द | उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्म | को | यशप्राप्त = यश को प्राप्त |
| करण | से / के द्वारा | हस्तलिखित = हाथ से लिखा |
| संप्रदान | के लिए | गुरुदक्षिणा = गुरु के लिए दक्षिणा |
| अपादान | से अलग / से मुक्त | ऋणमुक्त = ऋण से मुक्त |
| संबंध | का / के / की | राजपुत्र = राजा का पुत्र |
| अधिकरण | में / पर | वनवास = वन में वास |
1️⃣3️⃣ विद्यार्थी अक्सर ये गलतियाँ करते हैं
गलती 1
गलत: हर संख्या वाले शब्द को द्विगु मानना।
सही: संख्या के साथ पूरे अर्थ और समूह/समाहार को देखें।
गलती 2
गलत: केवल पहला शब्द देखकर समास तय करना।
सही: पूरा विग्रह करें और संबंध पहचानें।
गलती 3
गलत: कर्मधारय और बहुव्रीहि को एक समझना।
सही: पूछें — “क्या यही व्यक्ति/वस्तु मुख्य है या किसी तीसरे का बोध हो रहा है?”
गलती 4
गलत: हर “से” वाले शब्द को बिना अर्थ देखे करण मानना।
सही: “से” का अर्थ साधन है या अलगाव/मुक्ति — यह देखें।
1️⃣4️⃣ SSC GD Exam Strategy
🎯 प्रश्न हल करने की रणनीति
- सबसे पहले समस्त पद का अर्थ समझें।
- विग्रह करने की कोशिश करें।
- “और” दिखाई दे → द्वंद्व की जाँच करें।
- संख्या + समूह → द्विगु की जाँच करें।
- विशेषण + विशेष्य → कर्मधारय की जाँच करें।
- किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का बोध → बहुव्रीहि की जाँच करें।
- विभक्ति-संबंध → तत्पुरुष की जाँच करें।
- पूर्वपद प्रधान और अव्यय जैसा प्रयोग → अव्ययीभाव की जाँच करें।
⏱️ Time Saving Method
यदि विकल्पों में अलग-अलग समास दिए हों, तो पहले आसान पहचान वाले विकल्प काटें। “और”, “का/के/की”, “के लिए”, “से”, “में/पर”, संख्या और तीसरे व्यक्ति का बोध जैसे संकेतों का उपयोग करें।
⚠️ Negative Marking से बचाव
सिर्फ अनुमान के आधार पर उत्तर न लगाएँ। यदि दो विकल्पों में भ्रम हो, तो पूरा विग्रह करके दोनों विकल्पों की तुलना करें।
1️⃣5️⃣ Quick Revision
| समास | याद रखने का संकेत | उदाहरण |
|---|---|---|
| अव्ययीभाव | पूर्वपद प्रधान | यथाशक्ति |
| तत्पुरुष | विभक्ति-संबंध, उत्तरपद प्रधान | राजपुत्र |
| कर्मधारय | विशेषण + विशेष्य | नीलकमल |
| द्विगु | संख्या + समूह | त्रिभुवन |
| द्वंद्व | “और” का भाव | माता-पिता |
| बहुव्रीहि | किसी तीसरे का बोध | दशानन |
🧠 10-Second Revision
और → द्वंद्व
संख्या + समूह → द्विगु
विशेषण + विशेष्य → कर्मधारय
तीसरा व्यक्ति/वस्तु → बहुव्रीहि
का/के/की, को, से, के लिए, में/पर → तत्पुरुष के संबंध देखें
पूर्वपद प्रधान + अव्ययी प्रयोग → अव्ययीभाव
1️⃣6️⃣ Final Revision Box
🏆 Golden Rules
- समास पहचानने से पहले विग्रह करें।
- विग्रह में “और” आए तो द्वंद्व की जाँच करें।
- संख्या + समूह का अर्थ हो तो द्विगु की जाँच करें।
- विशेषण + विशेष्य हो तो कर्मधारय की जाँच करें।
- किसी तीसरे का बोध हो तो बहुव्रीहि की जाँच करें।
- विभक्ति-संबंध और उत्तरपद प्रधानता हो तो तत्पुरुष की जाँच करें।
🔥 Top Examples
यथाशक्ति — अव्ययीभाव
राजपुत्र — संबंध तत्पुरुष
हस्तलिखित — करण तत्पुरुष
गुरुदक्षिणा — संप्रदान तत्पुरुष
ऋणमुक्त — अपादान तत्पुरुष
वनवास — अधिकरण तत्पुरुष
नीलकमल — कर्मधारय
त्रिभुवन — द्विगु
माता-पिता — द्वंद्व
दशानन — बहुव्रीहि
⚡ Final Exam Formula
समास = शब्दों का संक्षिप्त रूप → विग्रह → संबंध पहचानें → समास का भेद चुनें
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