SSC GD हिंदी — संधि (Sandhi)
📘 Chapter Introduction
संधि हिंदी व्याकरण का वह महत्वपूर्ण भाग है जिसमें दो वर्णों या शब्दांशों के पास-पास आने पर उच्चारण की सुविधा के कारण ध्वनि या वर्ण में परिवर्तन होता है और नया शब्द बनता है।
संधि-विच्छेद में संधि से बने शब्द को उसके मूल घटक शब्दों/वर्णों में अलग किया जाता है।
इस Chapter में आप क्या सीखेंगे?
- संधि की परिभाषा और मूल अवधारणा
- संधि और संधि-विच्छेद
- स्वर संधि के पाँच प्रमुख भेद
- व्यंजन संधि के महत्वपूर्ण नियम
- विसर्ग संधि के परीक्षा-उपयोगी नियम
- संधि पहचानने की Tricks
- SSC GD स्तर के Solved Examples और PYQ
- Basic से Advanced Practice Questions
📑 Table of Contents
1️⃣ Complete Basic Concepts
संधि का सरल अर्थ
जब दो वर्ण या शब्दांश आपस में मिलते हैं और उनके मेल से ध्वनि/वर्ण में परिवर्तन होकर नया रूप बनता है, तो उस प्रक्रिया को संधि कहते हैं।
उदाहरण
हिम + आलय → हिमालय
यहाँ “अ + आ” के मेल से “आ” हुआ। इसलिए यह दीर्घ स्वर संधि है।
संधि और संधि-विच्छेद में अंतर
| शब्द | प्रक्रिया | रूप |
|---|---|---|
| हिम + आलय → हिमालय | संधि | दो घटकों से नया रूप |
| हिमालय → हिम + आलय | संधि-विच्छेद | संधियुक्त शब्द को अलग करना |
संधि पहचानने की पहली सीढ़ी
- पहले देखें कि परिवर्तन मुख्यतः स्वरों में है या नहीं।
- यदि व्यंजन के कारण परिवर्तन हुआ है, तो व्यंजन संधि पर विचार करें।
- यदि शब्द में “ः” का परिवर्तन दिखाई दे, तो विसर्ग संधि जाँचें।
- फिर नियम लगाकर संधि-विच्छेद करें।
2️⃣ Important Definitions
3️⃣ संधि के मुख्य भेद
1. स्वर संधि
दो स्वरों के मेल से परिवर्तन।
उदाहरण: देव + इन्द्र → देवेन्द्र
2. व्यंजन संधि
व्यंजन के मेल से परिवर्तन।
उदाहरण: सत् + जन → सज्जन
3. विसर्ग संधि
विसर्ग के मेल से परिवर्तन।
उदाहरण: मनः + हर → मनोहर
4️⃣ स्वर संधि — Complete Notes
स्वर संधि में दो स्वरों के मेल से परिवर्तन होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इसके पाँच प्रमुख भेद विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं:
| भेद | मुख्य नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| दीर्घ | समान/सजातीय स्वर मिलकर दीर्घ होते हैं | हिम + आलय = हिमालय |
| गुण | अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर् | नर + इन्द्र = नरेन्द्र |
| वृद्धि | अ/आ + ए/ऐ = ऐ; अ/आ + ओ/औ = औ | सदा + एव = सदैव |
| यण | इ/ई → य्, उ/ऊ → व्, ऋ → र् जब आगे भिन्न स्वर आए | इति + आदि = इत्यादि |
| अयादि | ए → अय्, ऐ → आय्, ओ → अव्, औ → आव् | ने + अन = नयन |
4.1 दीर्घ संधि
अ + अ = आ
अ + आ = आ
आ + अ = आ
आ + आ = आ
इ + इ = ई
इ + ई = ई
ई + इ = ई
ई + ई = ई
उ + उ = ऊ
उ + ऊ = ऊ
ऊ + उ = ऊ
ऊ + ऊ = ऊ
Important Examples
- हिम + आलय = हिमालय
- विद्या + आलय = विद्यालय
- रवि + इन्द्र = रवीन्द्र
- गिरि + ईश = गिरीश
- सु + उक्ति = सूक्ति
4.2 गुण संधि
अ/आ + इ/ई = ए
अ/आ + उ/ऊ = ओ
अ/आ + ऋ = अर्
Examples
- नर + इन्द्र = नरेन्द्र
- सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र
- महा + ईश = महेश
- महा + उत्सव = महोत्सव
- पर + उपकार = परोपकार
4.3 वृद्धि संधि
अ/आ + ए/ऐ = ऐ
अ/आ + ओ/औ = औ
Examples
- सदा + एव = सदैव
- मत + ऐक्य = मतैक्य
- महा + औषधि = महौषधि
4.4 यण संधि
इ/ई → य्
उ/ऊ → व्
ऋ → र्
जब इनके बाद कोई भिन्न स्वर आता है, तो यह परिवर्तन हो सकता है।
Examples
- इति + आदि = इत्यादि
- प्रति + एक = प्रत्येक
- सु + आगत = स्वागत
- अनु + एषण = अन्वेषण
4.5 अयादि संधि
ए → अय्
ऐ → आय्
ओ → अव्
औ → आव्
Examples
- ने + अन = नयन
- गै + अक = गायक
- नौ + इक = नाविक
- पौ + अक = पावक
- पो + अन = पवन
5️⃣ व्यंजन संधि — Complete Notes
जब किसी व्यंजन का मेल स्वर या दूसरे व्यंजन से होता है और उस मेल के कारण व्यंजन में परिवर्तन होता है, तो उसे व्यंजन संधि कहते हैं।
महत्वपूर्ण नियम 1 — वर्ग के प्रथम वर्ण का तृतीय वर्ण होना
| मूल व्यंजन | परिवर्तन | उदाहरण |
|---|---|---|
| क् | ग् | दिक् + गज = दिग्गज |
| च् | ज् | उदाहरण आवश्यकता अनुसार नियम-आधारित |
| ट् | ड् | षट् + आनन = षडानन |
| त् | द् | जगत् + ईश = जगदीश |
| प् | ब् | सुप् + अन्त = सुबन्त |
महत्वपूर्ण नियम 2 — त् + च/ज
- सत् + जन = सज्जन
- सत् + चरित्र = सच्चरित्र
- उत् + ज्वल = उज्ज्वल
- उत् + चारण = उच्चारण
महत्वपूर्ण नियम 3 — त् + ह
उत् + हार = उद्धार
यहाँ त् के कारण आगे के ह के साथ परिवर्तन होकर “द्ध” रूप बनता है।
महत्वपूर्ण नियम 4 — त् + ल
- उत् + लेख = उल्लेख
- तत् + लीन = तल्लीन
महत्वपूर्ण नियम 5 — त् + न
उत् + नत = उन्नत
यहाँ त् का परिवर्तन न् के प्रभाव से होता है।
महत्वपूर्ण नियम 6 — त् + म
जगत् + मय = जगन्मय
चित् + मय = चिन्मय
महत्वपूर्ण नियम 7 — म् का अनुस्वार रूप
- सम् + योग = संयोग
- सम् + शय = संशय
- सम् + सार = संसार
- सम् + वाद = संवाद
महत्वपूर्ण नियम 8 — स्वर + छ
- अनु + छेद = अनुच्छेद
- वि + छेद = विच्छेद
- परि + छेद = परिच्छेद
- आ + छादन = आच्छादन
6️⃣ विसर्ग संधि — Complete Notes
विसर्ग का चिह्न ः है। जब विसर्ग के साथ किसी स्वर या व्यंजन का मेल होने पर विसर्ग में परिवर्तन होता है, तो उसे विसर्ग संधि कहते हैं।
6.1 विसर्ग → ओ
जब विसर्ग से पहले सामान्यतः “अ” हो और उसके बाद उपयुक्त घोष वर्ण/स्वर आदि आए, तो कई शब्दों में विसर्ग “ओ” में बदलता है।
- मनः + हर = मनोहर
- यशः + दा = यशोदा
- तपः + वन = तपोवन
- तेजः + मय = तेजोमय
6.2 विसर्ग → र्
कई स्थितियों में यदि विसर्ग से पहले अ/आ को छोड़कर कोई अन्य स्वर हो और आगे उपयुक्त स्वर/घोष वर्ण आए, तो विसर्ग “र्” में परिवर्तित हो सकता है।
- निः + आशा = निराशा
- निः + रोग = नीरोग
- दुः + बल = दुर्बल
- बहिः + गमन = बहिर्गमन
6.3 विसर्ग → स् / ष् आदि रूप
- निः + कपट = निष्कपट
- निः + फल = निष्फल
- निः + चल = निश्चल
- दुः + कर = दुष्कर
- निः + संदेह = निस्संदेह
6.4 विसर्ग यथावत् रह सकता है
- मनःस्थिति = मनः + स्थिति
- दुःशासन = दुः + शासन
- प्रातःकाल = प्रातः + काल
मनः + हर → मनोहर
यशः + दा → यशोदा
निः + आशा → निराशा
निः + कपट → निष्कपट
दुः + कर → दुष्कर
7️⃣ Tricks and Shortcut Methods
⚡ Trick 1 — तीन मुख्य भेद
स्वर + स्वर → स्वर संधि
व्यंजन में बदलाव → व्यंजन संधि
ः का बदलाव → विसर्ग संधि
⚡ Trick 2 — गुण पहचानें
अ/आ + इ/ई = ए
अ/आ + उ/ऊ = ओ
उदाहरण: महा + उत्सव = महोत्सव
⚡ Trick 3 — वृद्धि पहचानें
अ/आ + ए/ऐ = ऐ
अ/आ + ओ/औ = औ
उदाहरण: सदा + एव = सदैव
⚡ Trick 4 — यण पहचानें
इ/ई → य्, उ/ऊ → व्, ऋ → र्
उदाहरण: इति + आदि = इत्यादि
⚡ Trick 5 — अयादि
ए → अय, ऐ → आय, ओ → अव, औ → आव
उदाहरण: ने + अन = नयन
⚡ Trick 6 — Common SSC GD Words
सज्जन = सत् + जन
जगदीश = जगत् + ईश
अनुच्छेद = अनु + छेद
मनोहर = मनः + हर
निराशा = निः + आशा
8️⃣ Solved Examples — Basic to Advanced
प्रश्न 1. हिम + आलय का संधि रूप क्या होगा?
प्रश्न 2. नरेन्द्र का सही संधि-विच्छेद क्या है?
प्रश्न 3. सदैव में कौन-सी संधि है?
प्रश्न 4. इत्यादि का सही संधि-विच्छेद क्या है?
प्रश्न 5. नयन में कौन-सी संधि है?
प्रश्न 6. दिग्गज का सही संधि-विच्छेद क्या है?
प्रश्न 7. निम्न में कौन-सा युग्म सही है?
9️⃣ VERIFIED PYQ SECTION
प्रश्न: “पत्रावली” शब्द का सही संधि-विच्छेद है—
पत्र + अवली में अ + अ के मेल से आ बनता है। इसलिए पत्र + अवली = पत्रावली। यह दीर्घ संधि का उदाहरण है।
परीक्षा: SSC GD Previous Paper
तिथि/Shift: 12 February 2019, Shift 1
स्रोत: उपलब्ध प्रश्न-स्रोत में इसे SSC GD Previous Paper के रूप में दर्ज किया गया है।
प्रश्न: निम्न में से कौन-सा एक उदाहरण विसर्ग संधि का नहीं है?
अनुच्छेद = अनु + छेद। यहाँ “उ” के बाद “छ” आने पर “छ” से पहले “च” जुड़ता है और अनुच्छेद बनता है। इसलिए यह व्यंजन संधि का उदाहरण है, विसर्ग संधि का नहीं।
परीक्षा: SSC GD Constable 2026 Official Paper
तिथि/Shift: 27 May 2026, Shift 3
Source Type: उपलब्ध प्रश्न-स्रोत द्वारा SSC GD 2026 Official Paper के रूप में सूचीबद्ध।
प्रश्न: निम्न में से शुद्ध शब्द कौन-सा है?
मानक रूप “मनःस्थिति” है। इसका संबंध मनः + स्थिति से है। प्रश्न में विसर्ग का प्रयोग/वर्तनी जाँची जा रही है।
परीक्षा: SSC GD Constable 2026 Official Paper
तिथि/Shift: 31 May 2026, Shift 3
🔟 Practice Questions
विस्तृत समाधान
विद्या + आलय में आ + आ के मेल से आ बना। इसलिए विद्यालय = विद्या + आलय।विस्तृत समाधान
महा + ईश में आ + ई = ए। इसलिए महेश बनता है। यह गुण संधि है।विस्तृत समाधान
इ + इ = ई। अतः रवि + इन्द्र = रवीन्द्र। यह दीर्घ संधि है।विस्तृत समाधान
महा + उत्सव = महोत्सव। आ + उ = ओ, इसलिए गुण संधि।विस्तृत समाधान
सदा + एव = सदैव। आ + ए = ऐ, इसलिए वृद्धि संधि।विस्तृत समाधान
प्रति + एक में इ के बाद ए आने पर इ → य् होकर प्रत्येक बनता है। यह यण संधि है।विस्तृत समाधान
सु + आगत में उ → व् होकर स्वागत बनता है। यह यण संधि का उदाहरण है।विस्तृत समाधान
गै + अक = गायक। ऐ → आय् होने के कारण यह अयादि संधि है।विस्तृत समाधान
सत् + जन में त् के बाद ज आने से परिवर्तन होकर सज्जन बनता है। यह व्यंजन संधि है।विस्तृत समाधान
जगत् + ईश में त् का द् रूप होकर जगदीश बनता है। यह व्यंजन संधि है।विस्तृत समाधान
मनः + हर में विसर्ग का ओ रूप होकर मनोहर बनता है। यह विसर्ग संधि है।विस्तृत समाधान
निः + आशा = निराशा। यहाँ विसर्ग र् में बदलता है। यह विसर्ग संधि है।विस्तृत समाधान
अनु + छेद = अनुच्छेद। छ से पहले च जुड़ने के कारण यह व्यंजन संधि है।विस्तृत समाधान
पर + उपकार = परोपकार। अ + उ = ओ, इसलिए गुण संधि।विस्तृत समाधान
नौ + इक = नाविक। औ → आव् होने के कारण अयादि संधि।विस्तृत समाधान
दिक् + गज में क् का ग् रूप होकर दिग्गज बनता है। यह व्यंजन संधि है।विस्तृत समाधान
मनोहर = मनः + हर। विसर्ग के ओ रूप में परिवर्तन के कारण यह विसर्ग संधि है।विस्तृत समाधान
चित् + मय = चिन्मय। त् और म के मेल से परिवर्तन हुआ, इसलिए व्यंजन संधि।विस्तृत समाधान
उत् + लेख में त् के बाद ल आने पर ल्ल रूप बनता है। इसलिए उल्लेख।विस्तृत समाधान
तेजः + मय = तेजोमय। विसर्ग के ओ में परिवर्तन के कारण यह विसर्ग संधि है।Answer Key
1️⃣1️⃣ Concept-Based Questions
1️⃣2️⃣ Advanced Level Section
Advanced Identification Method
Step 1
शब्द को संभावित दो भागों में विभाजित करें।
Step 2
दोनों भागों के अंतिम और प्रथम वर्ण को देखें।
Step 3
स्वर परिवर्तन हो तो स्वर संधि के नियम लगाएँ।
Step 4
व्यंजन परिवर्तन हो तो व्यंजन संधि जाँचें।
Step 5
“ः” से संबंध हो तो विसर्ग संधि जाँचें।
Step 6
अंत में बने शब्द से दोबारा मिलान करें।
Mixed Challenge
| शब्द | संधि-विच्छेद | भेद |
|---|---|---|
| नरेन्द्र | नर + इन्द्र | गुण |
| सदैव | सदा + एव | वृद्धि |
| इत्यादि | इति + आदि | यण |
| नयन | ने + अन | अयादि |
1️⃣3️⃣ विद्यार्थी अक्सर ये गलतियां करते हैं
गलती 1 — संधि और समास को एक समझना
गलत: हर दो शब्दों के मेल को समास मान लेना।
सही: संधि मुख्यतः वर्ण/ध्वनि परिवर्तन की प्रक्रिया है, जबकि समास में शब्दों का संक्षिप्त रूप बनता है।
गलती 2 — नयन को यण संधि मान लेना
सही: ने + अन = नयन → अयादि संधि।
गलती 3 — अनुच्छेद को विसर्ग संधि मानना
सही: अनु + छेद = अनुच्छेद → व्यंजन संधि।
गलती 4 — केवल अंतिम शब्द देखकर उत्तर देना
संधि का प्रकार तय करने से पहले संभावित संधि-विच्छेद अवश्य जाँचें।
गलती 5 — “ः” वाले हर शब्द में एक ही विसर्ग नियम लगाना
विसर्ग के आगे आने वाले वर्ण और विसर्ग से पहले के स्वर के आधार पर नियम बदल सकता है।
1️⃣4️⃣ Exam Strategy
SSC GD में संधि के प्रश्न कैसे हल करें?
- पहले प्रश्न का प्रकार पहचानें: संधि-विच्छेद, संधि का भेद या सही शब्द।
- विसर्ग दिखे तो: सबसे पहले विसर्ग संधि जाँचें।
- दो स्वर दिखें: दीर्घ → गुण → वृद्धि → यण → अयादि के नियम क्रम से जाँचें।
- व्यंजन परिवर्तन दिखे: व्यंजन संधि के प्रमुख नियम याद करें।
- Options का उपयोग करें: गलत विच्छेद को शब्द जोड़कर तुरंत eliminate करें।
- अर्थ से भी मिलान करें: विच्छेद के दोनों भाग वास्तविक शब्द/शब्दांश होने चाहिए।
- Negative marking: 2026 के आधिकारिक पैटर्न में गलत उत्तर पर 0.25 अंक कटते हैं, इसलिए केवल अनुमान के आधार पर उत्तर न दें।
“ः → विसर्ग”
“अ/आ + इ/ई → गुण”
“अ/आ + ए/ऐ → वृद्धि”
“इ/ई → य, उ/ऊ → व → यण”
“ए/ऐ/ओ/औ → अय/आय/अव/आव → अयादि”
1️⃣5️⃣ Quick Revision
दीर्घ
समान स्वर → दीर्घ
हिम + आलय = हिमालयगुण
अ/आ + इ/ई = ए
अ/आ + उ/ऊ = ओ
नर + इन्द्र = नरेन्द्रवृद्धि
अ/आ + ए/ऐ = ऐ
अ/आ + ओ/औ = औ
सदा + एव = सदैवयण
इ/ई → य्
उ/ऊ → व्
ऋ → र्
इति + आदि = इत्यादिअयादि
ए → अय्
ऐ → आय्
ओ → अव्
औ → आव्
व्यंजन
सत् + जन = सज्जन
जगत् + ईश = जगदीश
अनु + छेद = अनुच्छेद
विसर्ग
मनः + हर = मनोहर
निः + आशा = निराशा
निः + कपट = निष्कपट
Top Exam Words
नरेन्द्र, महोत्सव, सदैव, इत्यादि, प्रत्येक, स्वागत, नयन, गायक, नाविक, सज्जन, दिग्गज, मनोहर
🔎 Ultra Quick Formula Sheet
| संधि | मुख्य सूत्र | Example |
|---|---|---|
| दीर्घ | अ/आ + अ/आ = आ | हिम + आलय = हिमालय |
| गुण | अ/आ + इ/ई = ए | नर + इन्द्र = नरेन्द्र |
| गुण | अ/आ + उ/ऊ = ओ | महा + उत्सव = महोत्सव |
| वृद्धि | अ/आ + ए/ऐ = ऐ | सदा + एव = सदैव |
| यण | इ/ई → य् | इति + आदि = इत्यादि |
| यण | उ/ऊ → व् | सु + आगत = स्वागत |
| अयादि | ए → अय् | ने + अन = नयन |
| अयादि | औ → आव् | नौ + इक = नाविक |
1️⃣6️⃣ Final Revision Box — अंतिम समय की तैयारी
🏆 Golden Rules
- स्वर + स्वर के परिवर्तन को पहले स्वर संधि के नियमों से जाँचें।
- अ/आ + इ/ई = ए → गुण
- अ/आ + उ/ऊ = ओ → गुण
- अ/आ + ए/ऐ = ऐ → वृद्धि
- इ/ई → य् और उ/ऊ → व् → यण
- ए → अय्, ऐ → आय्, ओ → अव्, औ → आव् → अयादि
- व्यंजन में परिवर्तन → व्यंजन संधि की जाँच करें।
- विसर्ग “ः” से संबंध → विसर्ग संधि की जाँच करें।
🔥 Top Examples
हिमालय, विद्यालय, रवीन्द्र, नरेन्द्र, महेश, महोत्सव, सदैव, इत्यादि, प्रत्येक, स्वागत, नयन, गायक, नाविक, सज्जन, जगदीश, दिग्गज, अनुच्छेद, मनोहर, निराशा, निष्कपट।
⚠ अंतिम Exam Trap
संधि का उत्तर केवल शब्द देखकर याद न करें। संधि-विच्छेद करके नियम लागू करें और फिर बने हुए शब्द से दोबारा मिलान करें। यही तरीका सबसे अधिक सुरक्षित है।