भारतीय इतिहास: राजपूत काल - UPSSSC PET Complete Notes
Target: UPSSSC PET Exam Level
1. Zero Explanation (शून्य से शुरुआत)
प्राचीन भारत के पतन और मध्यकाल के उदय के बीच के संक्रमण काल (लगभग 7वीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी के अंत तक) को 'राजपूत काल' कहा जाता है। इस काल में उत्तर और पश्चिम भारत में कई स्वतंत्र क्षेत्रीय राजवंशों का उदय हुआ, जिन्हें सामूहिक रूप से 'राजपूत' कहा गया। राजपूत स्वयं को प्राचीन क्षत्रियों का वंशज मानते थे। इस काल की विशेषता राजनीतिक विखंडन, सामंतवादी व्यवस्था का प्रसार और भव्य मंदिर वास्तुकला थी।
- सामंत (Samanta): क्षेत्रीय भू-स्वामी या अधीनस्थ शासक जो राजा को सैन्य सहायता और कर देते थे।
- अग्निकुंड का सिद्धांत: चंद्रबरदाई की रचना 'पृथ्वीराज रासो' में वर्णित राजपूतों की उत्पत्ति का पौराणिक सिद्धांत।
- नागर शैली (Nagara Style): उत्तर भारत के मंदिरों के निर्माण की वास्तुकला शैली।
2. Basic Concepts (बुनियादी अवधारणाएं)
राजपूत काल के प्रमुख राजवंश और उनके संस्थापक:
- प्रतिहार वंश (Gurjara-Pratiharas): कन्नौज के लिए संघर्ष करने वाला प्रमुख वंश (संस्थापक: नागभट्ट प्रथम / मिहिर भोज प्रसिद्ध शासक)।
- चाहमान या चौहान वंश (Chahamanas): अजमेर और दिल्ली के आसपास का क्षेत्र (संस्थापक: वासुदेव / पृथ्वीराज तृतीय प्रसिद्ध शासक)।
- चंदेल वंश (Chandelas): बुंदेलखंड क्षेत्र (संस्थापक: नन्नुक / खजुराहो के मंदिर निर्माण के लिए प्रसिद्ध)।
- परमार वंश (Paramaras): मालवा क्षेत्र (संस्थापक: उपेंद्र / राजा भोज प्रसिद्ध शासक)।
- सोलंकी या चालुक्य वंश (Solankis): गुजरात क्षेत्र (संस्थापक: मूलराज प्रथम)।
3. Intermediate Concepts (मध्यवर्ती अवधारणाएं)
राजपूत काल के प्रमुख राजवंश, उनकी राजधानियाँ और मुख्य योगदान की तालिका:
| राजवंश | प्रमुख क्षेत्र/राजधानी | प्रसिद्ध शासक एवं योगदान |
|---|---|---|
| गुर्जर-प्रतिहार | कन्नौज / भीनमाल | मिहिर भोज - महान साम्राज्यवादी और वैष्णव भक्त। |
| चंदेल वंश | खजुराहो / महोबा | विद्याधर - गजनवी का मुकाबला करने वाला; खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिरों का निर्माण। |
| चौहान वंश | अजमेर / शाकंभरी | पृथ्वीराज चौहान (तृतीय) - तराइन के युद्ध। |
| परमार वंश | धार (मालवा) | राजा भोज - विद्वान शासक, भोजपुर झील का निर्माण। |
| सोलंकी वंश | अहिलवाड़ (गुजरात) | भीम प्रथम - इसके काल में गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण (1025 ई.)। |
4. Advanced Concepts (उन्नत अवधारणाएं)
राजपूत राजनीतिक संरचना मूलतः सामंतवादी (Feudal) थी, जिसमें राजा सर्वोच्च होता था परंतु उसकी शक्ति उसके सामंतों के सहयोग पर निर्भर करती थी। त्रिपक्षीय संघर्ष (Tripartite Struggle) प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट राजवंशों के बीच कन्नौज पर आधिपत्य जमाने के लिए लगभग दो शताब्दियों तक चला, जो इस काल की भू-राजनीतिक स्थिति का केंद्रीय बिंदु था। केंद्रीय एकता के अभाव और आंतरिक फूट ने विदेशी आक्रमणकारियों (जैसे महमूद गजनवी और मोहम्मद गोरी) के लिए भारत के द्वार खोल दिए।
5. Confusion Clear (भ्रम निवारण)
स्पष्टीकरण: भारतीय इतिहास में 'चालुक्य' नाम से तीन प्रमुख राजवंश मिलते हैं -
- बातापी (बादामी) के चालुक्य: दक्षिण भारत के प्राचीन शासक (जैसे पुलकेशिन द्वितीय)।
- कल्याणी के चालुक्य: बाद के दक्षिण भारतीय शासक।
- गुजरात के चालुक्य (सोलंकी): राजपूत काल के अंतर्गत आने वाले गुजरात के शासक (मूलराज, भीम प्रथम)।
6. Cause -> Event -> Result (कारण, घटना और प्रभाव)
- Cause (कारण): राजपूत राजाओं के बीच आपसी फूट, राजनीतिक एकता का अभाव और संकुचित क्षेत्रीय दृष्टिकोण।
- Event (घटना): 1191 ई. (तराइन का प्रथम युद्ध) और 1192 ई. (तराइन का द्वितीय युद्ध) पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी के बीच।
- Result (परिणाम): तराइन के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की पराजय, जिसके परिणामस्वरूप भारत में तुर्क सल्तनत की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
7. UPSSSC PET Exam Focus (परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु)
- खजुराहो के मंदिर: चंदेल शासकों द्वारा निर्मित (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल)।
- तराइन का प्रथम युद्ध: 1191 ई. (पृथ्वीराज चौहान की विजय)।
- तराइन का द्वितीय युद्ध: 1192 ई. (मोहम्मद गोरी की विजय)।
- सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण: 1025 ई. में महमूद गजनवी द्वारा (सोलंकी शासक भीम प्रथम के समय)।
- पृथ्वीराज रासो: चंद्रबरदाई द्वारा रचित महाकाव्य।
8. One-Liner Revision (वन-लाइनर रिवीजन)
- प्रतिहार वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली राजा मिहिर भोज था।
- खजुराहो के कंदारिया महादेव मंदिर का निर्माण चंदेल शासकों ने करवाया था।
- राजा भोज ने धार में संस्कृत पाठशाला (भोजशाला) की स्थापना की थी।
- जयचंद कन्नौज के गड़वाल वंश का प्रसिद्ध शासक था।
9. Rapid Revision Notes (रैपिड रिवीजन)
राजपूत काल (7वीं से 12वीं शताब्दी) क्षेत्रीय राज्यों के उदय, सामंतवाद और शानदार वास्तुकला (जैसे खजुराहो, दिलवाड़ा मंदिर) के लिए जाना जाता है। प्रतिहार, चौहान, चंदेल और परमार इस काल के प्रमुख स्तंभ थे। आपसी संघर्ष और तराइन के युद्धों के साथ इस काल का राजनीतिक पतन हुआ।
10. Last Minute Revision (अंतिम समय का रिवीजन)
प्रतिहार = मिहिर भोज. चंदेल = खजुराहो मंदिर. चौहान = पृथ्वीराज तृतीय (तराइन 1191/1192). परमार = राजा भोज. सोलंकी = सोमनाथ आक्रमण (1025).
11. Chapter Summary (अध्याय सारांश)
इस अध्याय में हमने राजपूत काल के विभिन्न राजवंशों, उनके संस्थापकों, प्रमुख शासकों, त्रिपक्षीय संघर्ष, वास्तुकला और ऐतिहासिक युद्धों का अध्ययन किया है जो UPSSSC PET पाठ्यक्रम की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
12. Chapter Revision Checklist (रिवीजन चेकलिस्ट)
- Rajput Dynasties & Founders (राजपूत राजवंश और संस्थापक)
- Tripartite Struggle (त्रिपक्षीय संघर्ष)
- Art & Architecture (खजुराहो और मंदिर निर्माण)
- Battles of Tarain (तराइन के युद्ध)
- Exam Points & One-Liners (परीक्षा बिंदु)
13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. राजपूतों की उत्पत्ति से संबंधित 'अग्निकुंड का सिद्धांत' किस ग्रंथ में मिलता है?
उत्तर: चंद्रबरदाई रचित 'पृथ्वीराज रासो' में।
Q2. गुर्जर-प्रतिहार वंश का संस्थापक कौन था?
उत्तर: नागभट्ट प्रथम।
Q3. खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिरों का निर्माण किस राजवंश के शासकों ने करवाया था?
उत्तर: चंदेल वंश के शासकों ने।
Q4. तराइन का प्रथम युद्ध किस वर्ष लड़ा गया था?
उत्तर: 1191 ईस्वी में।
Q5. तराइन के द्वितीय युद्ध में किसकी हार हुई थी?
उत्तर: पृथ्वीराज चौहान की।
Q6. महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किस वर्ष किया था?
उत्तर: 1025 ईस्वी में।
Q7. 'पृथ्वीराज रासो' के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: चंद्रबरदाई।
Q8. परमार वंश के सबसे प्रसिद्ध और विद्वान शासक कौन थे?
उत्तर: राजा भोज।