🇮🇳 मराठा साम्राज्य — Basic से Advanced Complete Notes
UPSSSC PET भारतीय इतिहास के लिए शिवाजी, मराठा प्रशासन, मुगल–मराठा संघर्ष, पेशवा व्यवस्था, मराठा संघ, प्रमुख युद्ध, चauth–सरदेशमुखी और तृतीय पानीपत युद्ध का व्यवस्थित अध्ययन।
📋 Table of Contents
1️⃣ Chapter Introduction
मराठा शक्ति मध्यकालीन भारत के उत्तरार्ध में उभरने वाली एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य शक्ति थी। 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी के नेतृत्व में पश्चिमी दक्कन में एक सशक्त राज्य का निर्माण हुआ। बाद में पेशवाओं के समय मराठा प्रभाव दक्कन से निकलकर मालवा, गुजरात, बुंदेलखंड, दिल्ली और उत्तर भारत के अनेक क्षेत्रों तक फैल गया।
मुख्य Subtopics
- शिवाजी का प्रारंभिक जीवन और स्वराज्य की अवधारणा
- शिवाजी के प्रमुख युद्ध और विस्तार
- सूरत पर आक्रमण, शाइस्ता खाँ और अफजल खाँ
- पुरंदर की संधि और आगरा की घटना
- 1674 का राज्याभिषेक
- अष्टप्रधान मंडल
- किले और गुरिल्ला युद्धनीति
- चauth एवं सरदेशमुखी
- शिवाजी के बाद की स्थिति
- संभाजी, राजाराम और ताराबाई
- पेशवाओं का उदय
- बाजीराव प्रथम और मराठा विस्तार
- बालाजी बाजीराव और तृतीय पानीपत
- माधवराव प्रथम और मराठा पुनरुत्थान
- सिंधिया, होलकर, गायकवाड़ और भोंसले
- आंग्ल–मराठा युद्ध और मराठा शक्ति का अंत
2️⃣ BASIC CONCEPTS
मराठा कौन थे?
मराठा मुख्यतः दक्कन क्षेत्र से संबंधित राजनीतिक-सैन्य शक्ति के रूप में उभरे। शिवाजी ने स्थानीय शक्ति, दुर्गों, तेज घुड़सवार सेना और संगठित प्रशासन के आधार पर एक स्वतंत्र राज्य को मजबूत किया।
स्वराज्य का अर्थ
स्वराज्य का सामान्य अर्थ है—अपने लोगों द्वारा अपना शासन। शिवाजी के राजनीतिक विचार में स्थानीय नियंत्रण, स्वतंत्र शासन और प्रभावी प्रशासन महत्वपूर्ण थे।
मराठा शक्ति के उदय के प्रमुख कारण
सह्याद्रि पर्वत, घाट और दुर्गम भू-भाग ने स्थानीय रक्षा और तेज सैन्य गतिविधियों में सहायता की।
किले मराठा सैन्य एवं प्रशासनिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्र बने।
तेज घुड़सवार सेना और परिस्थितिनुसार बदलती युद्ध रणनीति उपयोगी रही।
शिवाजी ने राजनीतिक संगठन, प्रशासन और सैन्य शक्ति को एक साथ विकसित किया।
“पर्वत + किला + घुड़सवार + संगठन = मराठा शक्ति”
3️⃣ IMPORTANT DEFINITIONS
| शब्द | अर्थ | Exam Point |
|---|---|---|
| स्वराज्य | स्वतंत्र/अपने लोगों का शासन | शिवाजी की राजनीतिक अवधारणा से जोड़ा जाता है |
| अष्टप्रधान | आठ प्रमुख मंत्रियों की परिषद | शिवाजी का प्रशासन |
| पेशवा | प्रधान मंत्री/मुख्य मंत्री | बाद में पेशवा मराठा राजनीति में वास्तविक शक्ति के केंद्र बने |
| चauth | राजस्व का लगभग एक-चौथाई हिस्सा | 25% |
| सरदेशमुखी | अतिरिक्त 10% लेवी | चauth के अतिरिक्त |
| गनिमी कावा | परिस्थिति के अनुसार तेज, छापामार/गतिशील युद्धनीति | शिवाजी की युद्धनीति से संबंधित |
| मराठा संघ | विभिन्न शक्तिशाली मराठा सरदारों का राजनीतिक समूह | पेशवा काल के उत्तरार्ध में महत्वपूर्ण |
| सुभा | बड़ा प्रशासनिक प्रांत | मराठा प्रशासन में क्षेत्रीय विभाजन के संदर्भ में महत्वपूर्ण |
4️⃣ छत्रपति शिवाजी — Complete Concepts
शिवाजी का परिचय
शिवाजी भोंसले परिवार से संबंधित थे। उनके पिता शाहजी भोंसले दक्कन की राजनीति में प्रभावशाली सैन्य सरदार थे। शिवाजी की माता जीजाबाई उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
शिवाजी — भोंसले वंश • पिता — शाहजी भोंसले • माता — जीजाबाई • प्रमुख केंद्र — महाराष्ट्र/दक्कन • राज्याभिषेक — 1674, रायगढ़।
शिवाजी की प्रारंभिक गतिविधियाँ
शिवाजी ने दक्कन में दुर्गों और स्थानीय क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बढ़ाना शुरू किया। तोरणा जैसे दुर्गों पर अधिकार उनके प्रारंभिक विस्तार से जुड़ा है। बाद में राजगढ़, पुरंदर, सिंहगढ़ आदि किलों का रणनीतिक महत्व बढ़ा।
अफजल खाँ और प्रतापगढ़
बीजापुर के सेनापति अफजल खाँ को शिवाजी के विरुद्ध भेजा गया। 1659 में प्रतापगढ़ के निकट हुई घटना में शिवाजी ने अफजल खाँ को पराजित किया। यह शिवाजी की प्रतिष्ठा और सैन्य शक्ति के लिए महत्वपूर्ण मोड़ था।
शाइस्ता खाँ
मुगल सम्राट औरंगजेब ने शिवाजी को दबाने के लिए शाइस्ता खाँ को दक्कन भेजा। शिवाजी ने पुणे में साहसिक हमला किया और शाइस्ता खाँ घायल हुआ।
सूरत पर आक्रमण
शिवाजी ने मुगल व्यापारिक केंद्र सूरत पर 1664 में आक्रमण किया। यह मुगल–मराठा संघर्ष में आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना थी।
पुरंदर की संधि — 1665
1665 में मुगल सेनापति मिर्जा राजा जयसिंह के अभियान के बाद शिवाजी को पुरंदर की संधि करनी पड़ी। संधि के अनुसार शिवाजी ने 23 दुर्ग मुगलों को दिए और 12 दुर्ग अपने पास रखे।
आगरा की घटना
पुरंदर की संधि के बाद शिवाजी औरंगजेब के दरबार में आगरा गए। वहाँ उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिलने पर विवाद हुआ और वे नजरबंदी से निकलकर दक्कन लौटने में सफल हुए।
शिवाजी का राज्याभिषेक — 1674
1674 में रायगढ़ में शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ और उन्होंने औपचारिक रूप से छत्रपति की उपाधि धारण की। इसके बाद उनका राज्य अधिक औपचारिक राजनीतिक स्वरूप में दिखाई देता है।
1665 = पुरंदर की संधि
1674 = शिवाजी का राज्याभिषेक
रायगढ़ = राज्याभिषेक का प्रमुख स्थल
शिवाजी की युद्धनीति
शिवाजी ने दुर्गों, स्थानीय भूगोल, तेज घुड़सवारों, अचानक आक्रमण और शीघ्र वापसी जैसी रणनीतियों का प्रभावी उपयोग किया। इसे सामान्यतः गनिमी कावा से जोड़ा जाता है।
“दुर्ग + गति + भूगोल + अचानक हमला”
🗓️ शिवाजी से संबंधित महत्वपूर्ण घटनाक्रम
5️⃣ शिवाजी का प्रशासन
अष्टप्रधान मंडल
शिवाजी की शासन व्यवस्था में अष्टप्रधान आठ प्रमुख पदाधिकारियों की परिषद थी। इसे आधुनिक अर्थ में पूर्ण मंत्रिमंडलीय व्यवस्था समझना उचित नहीं है, लेकिन यह शिवाजी के प्रशासनिक संगठन का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग था।
| पद | मुख्य कार्य | याद रखने का संकेत |
|---|---|---|
| पेशवा / पंतप्रधान | प्रधान मंत्री एवं सामान्य प्रशासन | प्रधान |
| अमात्य / मजुमदार | वित्त एवं लेखा | अर्थ/खाता |
| सचिव | राजकीय पत्र/दस्तावेज | सचिवालय |
| मंत्री | दरबारी/आंतरिक सूचनात्मक कार्य | आंतरिक व्यवस्था |
| सेनापति | सेना का नेतृत्व | सेना |
| सुमंत / दबीर | विदेशी संबंध/कूटनीति | Foreign Affairs |
| न्यायाधीश | न्यायिक कार्य | न्याय |
| पंडितराव | धार्मिक/दान-संबंधी कार्य | धर्म |
राजस्व व्यवस्था
शिवाजी ने भूमि-राजस्व को व्यवस्थित करने का प्रयास किया। भूमि की उपज और स्थिति का आकलन कर राजस्व निर्धारित करने पर जोर दिया गया। किसानों के साथ प्रशासनिक संपर्क को अधिक व्यवस्थित किया गया।
दुर्ग प्रशासन
मराठा शक्ति में किलों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका थी। किले रक्षा, रसद, प्रशासन और क्षेत्रीय नियंत्रण के केंद्र थे।
नौसेना
शिवाजी ने समुद्री तट की सुरक्षा और समुद्री शक्ति के महत्व को समझते हुए नौसैनिक क्षमता विकसित की। पश्चिमी तट पर समुद्री दुर्गों का रणनीतिक महत्व था।
सैन्य व्यवस्था
- घुड़सवार सेना का महत्वपूर्ण स्थान।
- किलों पर आधारित रक्षा व्यवस्था।
- तेज गति और स्थानीय भूगोल का उपयोग।
- अचानक आक्रमण और शीघ्र वापसी।
- स्थानीय संसाधनों और सूचनाओं का उपयोग।
6️⃣ चauth एवं सरदेशमुखी
चauth
सामान्यतः संबंधित क्षेत्र के निर्धारित राजस्व का 1/4 अर्थात 25%।
सरदेशमुखी
चauth के अतिरिक्त सामान्यतः 10% की लेवी।
मराठा शक्ति के विस्तार के दौरान ऐसे क्षेत्रों से भी ये वसूली की जाती थी जो हमेशा सीधे मराठा प्रशासन के अधीन नहीं थे। इसलिए इसे केवल “मराठा राज्य के अंदर का सामान्य भूमि-कर” समझना गलत होगा।
Chauth = 25%
Sardeshmukhi = अतिरिक्त 10%
“सरदेशमुखी = दस = 10%”
7️⃣ मुगल–मराठा संघर्ष
औरंगजेब और शिवाजी
शिवाजी और मुगल सत्ता के बीच संघर्ष समय-समय पर युद्ध, संधि और कूटनीति के रूप में चलता रहा। औरंगजेब के शासनकाल में दक्कन की राजनीति में मराठों का महत्व लगातार बढ़ता गया।
शिवाजी के बाद
1680 में शिवाजी की मृत्यु के बाद उनके पुत्र संभाजी ने नेतृत्व संभाला। औरंगजेब ने दक्कन में लंबे समय तक मुगल सैन्य अभियान चलाया। संभाजी को 1689 में मुगलों ने पकड़कर मृत्यु दंड दिया।
राजाराम और ताराबाई
संभाजी के बाद राजाराम ने प्रतिरोध जारी रखा। राजाराम की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ताराबाई ने मराठा प्रतिरोध का नेतृत्व किया।
शिवाजी → संभाजी → राजाराम → ताराबाई के नेतृत्व में प्रतिरोध
मुगल–मराठा युद्ध का परिणाम
औरंगजेब का लंबे समय तक दक्कन में रहना मुगल संसाधनों पर भारी पड़ा। 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य की केंद्रीय शक्ति कमजोर हुई और मराठों ने पुनः तेजी से विस्तार किया।
8️⃣ पेशवा काल
शाहू के समय पेशवा पद का राजनीतिक महत्व तेजी से बढ़ा। बाद में पेशवा मराठा शक्ति के वास्तविक राजनीतिक नेतृत्व के प्रमुख केंद्र बन गए।
| पेशवा | महत्व | Exam Focus |
|---|---|---|
| बालाजी विश्वनाथ | पेशवा पद को मजबूत किया | शाहू के समय |
| बाजीराव प्रथम | तेज सैन्य विस्तार और उत्तर भारत की ओर मराठा प्रभाव | “बाजीराव = विस्तार” |
| बालाजी बाजीराव (नाना साहेब) | मराठा शक्ति का व्यापक विस्तार | 1761 पानीपत |
| माधवराव प्रथम | पानीपत के बाद मराठा शक्ति के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण | पुनरुत्थान |
| बाजीराव द्वितीय | अंतिम पेशवा; ब्रिटिश के साथ संघर्ष और 1818 में मराठा शक्ति का पतन | आंग्ल–मराठा युद्ध |
बालाजी विश्वनाथ
बालाजी विश्वनाथ ने शाहू की स्थिति मजबूत करने और मराठा राजनीति को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पेशवा पद का प्रभाव बढ़ने की प्रक्रिया उनके समय में स्पष्ट हुई।
बाजीराव प्रथम
बाजीराव प्रथम को मराठा साम्राज्य के सबसे प्रभावशाली सैन्य नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने मराठा शक्ति को दक्कन से बाहर उत्तर भारत की दिशा में विस्तारित किया।
बालाजी बाजीराव
बालाजी बाजीराव के समय मराठा प्रभाव बहुत व्यापक हुआ, लेकिन 1761 का तृतीय पानीपत युद्ध मराठा विस्तार के लिए गंभीर झटका साबित हुआ।
माधवराव प्रथम
पानीपत के बाद माधवराव प्रथम ने मराठा शक्ति को पुनर्गठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसलिए परीक्षा में “पानीपत के बाद मराठा पुनरुत्थान” के संदर्भ में उनका नाम महत्वपूर्ण है।
9️⃣ मराठा संघ (Maratha Confederacy)
18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में मराठा राजनीतिक व्यवस्था अधिक संघात्मक स्वरूप में विकसित हुई। पेशवा सर्वोच्च राजनीतिक केंद्र थे, लेकिन शक्तिशाली मराठा सरदारों के अपने-अपने क्षेत्र और हित थे।
| मराठा घराना | प्रमुख क्षेत्र/केंद्र | Exam Association |
|---|---|---|
| सिंधिया / शिंदे | ग्वालियर; उत्तर भारत में प्रभाव | महादजी सिंधिया |
| होलकर | इंदौर | मल्हारराव होलकर |
| गायकवाड़ | बड़ौदा (वडोदरा) | गुजरात |
| भोंसले | नागपुर | नागपुर शाखा |
| पेशवा | पुणे | केंद्रीय राजनीतिक नेतृत्व |
“हो-इंदौर, गा-बड़ौदा, भो-नागपुर, सिं-ग्वालियर”
होलकर → इंदौर | गायकवाड़ → बड़ौदा | भोंसले → नागपुर | सिंधिया → ग्वालियर
महादजी सिंधिया
महादजी सिंधिया ने उत्तर भारत में मराठा प्रभाव को पुनः स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिल्ली की राजनीति में सिंधिया शक्ति का प्रभाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा।
नाना फड़नवीस
नाना फड़नवीस मराठा राजनीति के प्रमुख राजनयिक और प्रशासक थे। वे विशेष रूप से 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध की मराठा राजनीति में महत्वपूर्ण हैं।
🔟 प्रमुख युद्ध एवं संधियाँ
| वर्ष | घटना | महत्व |
|---|---|---|
| 1659 | प्रतापगढ़/अफजल खाँ प्रकरण | शिवाजी की शक्ति में वृद्धि |
| 1664 | सूरत पर आक्रमण | मुगल व्यापारिक केंद्र पर मराठा हमला |
| 1665 | पुरंदर की संधि | शिवाजी–मुगल समझौता |
| 1674 | शिवाजी का राज्याभिषेक | रायगढ़ |
| 1680 | शिवाजी की मृत्यु | उत्तराधिकार का नया चरण |
| 1737 | दिल्ली क्षेत्र में बाजीराव प्रथम का अभियान | मुगल सत्ता पर मराठा दबाव |
| 1761 | तृतीय पानीपत युद्ध | मराठा विस्तार को गंभीर झटका |
| 1775–1782 | प्रथम आंग्ल–मराठा युद्ध | सालबाई की संधि से समाप्त |
| 1803–1805 | द्वितीय आंग्ल–मराठा युद्ध | ब्रिटिश प्रभाव में वृद्धि |
| 1817–1818 | तृतीय आंग्ल–मराठा युद्ध | मराठा राजनीतिक शक्ति का निर्णायक पतन |
तृतीय पानीपत का युद्ध — 14 जनवरी 1761
मराठा सेना और अहमद शाह दुर्रानी (अब्दाली) के नेतृत्व वाले अफगान गठबंधन के बीच पानीपत में निर्णायक युद्ध हुआ। मराठा सेना का नेतृत्व सदाशिवराव भाऊ ने किया।
पानीपत का प्रथम युद्ध — 1526 — बाबर बनाम इब्राहिम लोदी
पानीपत का द्वितीय युद्ध — 1556 — अकबर की सेना/बैरम खाँ बनाम हेमू
पानीपत का तृतीय युद्ध — 1761 — मराठा बनाम अहमद शाह दुर्रानी
तृतीय आंग्ल–मराठा युद्ध और पतन
1817–1818 के संघर्ष के बाद पेशवा की राजनीतिक सत्ता समाप्त हुई और मराठा शक्ति पर ब्रिटिश प्रभुत्व निर्णायक हो गया।
🧭 मराठा काल की Master Chronology
1️⃣1️⃣ मराठा संस्कृति, समाज और स्थापत्य
स्थापत्य
- किले मराठा स्थापत्य और सैन्य संस्कृति का महत्वपूर्ण भाग थे।
- रायगढ़, प्रतापगढ़, सिंहगढ़, राजगढ़ आदि दुर्ग ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
- समुद्री दुर्गों ने पश्चिमी तट की सुरक्षा में योगदान दिया।
साहित्य और भाषा
मराठी भाषा और साहित्य का मराठा राजनीतिक-सांस्कृतिक विकास से गहरा संबंध रहा। प्रशासन और स्थानीय सामाजिक जीवन में मराठी का महत्व था।
भक्ति परंपरा और मराठा क्षेत्र
महाराष्ट्र में भक्ति परंपरा की समृद्ध पृष्ठभूमि थी। तुकाराम जैसे संत शिवाजी के समकालीन थे। यह तथ्य UPSSSC PET में सीधे पूछा जा चुका है।
🧠 Important Personalities
मराठा राज्य के संस्थापक और प्रमुख शासक।
शिवाजी के पिता।
शिवाजी की माता।
शिवाजी के उत्तराधिकारी; मुगलों से संघर्ष।
संभाजी के बाद मराठा प्रतिरोध का नेतृत्व।
राजाराम की मृत्यु के बाद प्रभावी नेतृत्व।
शाहू के समय प्रभावशाली पेशवा।
मराठा विस्तार के प्रमुख सैन्य नेता।
तृतीय पानीपत के समय पेशवा।
पानीपत के बाद मराठा पुनरुत्थान।
उत्तर भारत में मराठा प्रभाव।
मराठा राजनीति के प्रमुख राजनयिक।
📝 SOLVED QUESTIONS
✅ Correct Answer: C) 1674
उत्तर एवं Explanation
✅ Correct Answer: B) 8
उत्तर एवं Explanation
✅ Correct Answer: C) 25%
उत्तर एवं Explanation
✅ Correct Answer: C) 1761
उत्तर एवं Explanation
1️⃣2️⃣ VERIFIED UPSSSC PET PYQ
नीचे केवल वे प्रश्न रखे गए हैं जिनके परीक्षा-वर्ष/पेपर-संदर्भ का उपलब्ध स्रोत से सत्यापन किया जा सका। जहां किसी प्रश्न का वास्तविक प्रश्न-पत्र संदर्भ स्पष्ट नहीं मिला, उसे PYQ नहीं कहा गया है।
प्रश्न: निम्न में से कौन से संत शिवाजी के समकालीन थे?
✅ Correct Answer: A) तुकाराम
Detailed Explanation
Concept: कालक्रम और भक्ति आंदोलन।
Trick: शिवाजी = 17वीं शताब्दी → तुकाराम = 17वीं शताब्दी।
प्रश्न: निम्नलिखित मराठा प्रमुखों का उनके क्षेत्रों के संबंध से मिलान करें:
(i) सिंधिया (ii) होलकर (iii) गायकवाड़ (iv) भोंसले
(a) इंदौर (b) नागपुर (c) उज्जैन (d) बड़ौदा
✅ Correct Answer: B) (i)-(c), (ii)-(a), (iii)-(d), (iv)-(b)
Detailed Explanation
Trick: हो-इंदौर, गा-बड़ौदा, भो-नागपुर, सिं-उज्जैन।
प्रश्न: शिवाजी की मृत्यु के बाद मराठा राज्य में प्रभावी शक्ति चितपावन ब्राह्मण परिवार के पास थी, जो पेशवा के रूप में कार्य करता था। मराठा साम्राज्य की राजधानी कौन-सा शहर बना?
✅ Correct Answer: D) पूना (पुणे)
Detailed Explanation
🎯 PYQ Pattern Based Important Questions
✅ Answer: A) अमात्य
✅ Answer: B) 1665
✅ Answer: C) गायकवाड़ — बड़ौदा
✅ Answer: B) सदाशिवराव भाऊ
✅ Answer: C) माधवराव प्रथम
1️⃣3️⃣ PRACTICE QUESTIONS
उत्तर: A
उत्तर: B
उत्तर: A
उत्तर: B
उत्तर: B
उत्तर: B
उत्तर: D
उत्तर: B
उत्तर: B
उत्तर: C
उत्तर: A
उत्तर: B
उत्तर: A
उत्तर: B
उत्तर: A
Answer Key
Detailed Solutions — Important Questions
Q12: 1664 सूरत → 1665 पुरंदर → 1666 आगरा → 1674 राज्याभिषेक। इसलिए B सही है।
Q13: 1761 के बाद माधवराव प्रथम ने मराठा शक्ति को पुनर्गठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
1️⃣4️⃣ ADVANCED LEVEL
कथन 1: चauth मराठा राज्य के सामान्य भूमि-राजस्व का दूसरा नाम था।
कथन 2: चauth सामान्यतः अन्य क्षेत्रों के राजस्व का चौथा हिस्सा मांगने से संबंधित थी।
✅ Answer: B
Explanation
1. पुरंदर की संधि
2. शिवाजी का राज्याभिषेक
3. तृतीय पानीपत युद्ध
4. तृतीय आंग्ल–मराठा युद्ध
✅ Answer: A
✅ Answer: C
Assertion (A): मराठा शक्ति ने 18वीं शताब्दी में उत्तर भारत में अपना प्रभाव बढ़ाया।
Reason (R): पेशवाओं के समय मराठा सैन्य और राजनीतिक शक्ति का विस्तार दक्कन से बाहर हुआ।
✅ Answer: A
✅ Answer: D
1️⃣5️⃣ COMMON MISTAKES
शिवाजी का राज्याभिषेक 1665 में हुआ।
शिवाजी का राज्याभिषेक 1674 में हुआ।
पुरंदर की संधि 1674 में हुई।
पुरंदर की संधि 1665 में हुई।
चauth = 10%
चauth = 25%; सरदेशमुखी = अतिरिक्त 10%।
होलकर = बड़ौदा
होलकर = इंदौर; गायकवाड़ = बड़ौदा।
भोंसले = इंदौर
भोंसले = नागपुर।
तृतीय पानीपत युद्ध 1818 में हुआ।
तृतीय पानीपत युद्ध = 1761; तृतीय आंग्ल–मराठा युद्ध = 1817–1818।
अष्टप्रधान में केवल सैन्य अधिकारी थे।
अष्टप्रधान में प्रशासन, वित्त, न्याय, विदेश, सेना और धार्मिक कार्यों से जुड़े पद थे।
1️⃣6️⃣ UPSSSC PET EXAM STRATEGY
पहले कौन से Topics करें?
- शिवाजी और उनकी प्रमुख घटनाएं
- अष्टप्रधान मंडल
- चauth एवं सरदेशमुखी
- पेशवा और प्रमुख पेशवा
- मराठा सरदारों के क्षेत्र
- तृतीय पानीपत युद्ध
- आंग्ल–मराठा युद्ध
- Chronology और Matching
Time Management
- सीधे तथ्य वाले प्रश्न पहले करें।
- Matching/Chronology में पहले निश्चित युग्म बनाएं।
- बहुत लंबे Statement प्रश्न में प्रत्येक कथन अलग-अलग जांचें।
- तारीखों में 1665, 1674, 1761 और 1818 को विशेष रूप से याद रखें।
1665 → पुरंदर
1674 → राज्याभिषेक
1761 → पानीपत III
1818 → मराठा राजनीतिक शक्ति का निर्णायक अंत
Option Elimination
यदि प्रश्न में “गायकवाड़–बड़ौदा”, “होलकर–इंदौर”, “भोंसले–नागपुर” जैसे स्पष्ट संबंध दिखाई दें, तो पहले उन्हें लॉक करें। Matching questions में एक निश्चित युग्म कई गलत विकल्पों को तुरंत हटाने में मदद करता है।
1️⃣7️⃣ QUICK REVISION BOX
✍️ 30-Second Revision
- मराठा राज्य के प्रमुख संस्थापक — छत्रपति शिवाजी
- पिता — शाहजी भोंसले
- माता — जीजाबाई
- शिवाजी का राज्याभिषेक — 1674
- राज्याभिषेक स्थल — रायगढ़
- प्रमुख प्रशासनिक परिषद — अष्टप्रधान
- चauth — 25%
- सरदेशमुखी — अतिरिक्त 10%
- पुरंदर की संधि — 1665
- सूरत पर प्रमुख आक्रमण — 1664
- शिवाजी का निधन — 1680
- संभाजी — शिवाजी के उत्तराधिकारी
- राजाराम — संभाजी के बाद
- ताराबाई — मराठा प्रतिरोध की प्रमुख नेता
- पेशवा — प्रधान मंत्री पद
- बाजीराव प्रथम — मराठा विस्तार
- बालाजी बाजीराव — तृतीय पानीपत के समय पेशवा
- माधवराव प्रथम — पानीपत के बाद पुनरुत्थान
- सिंधिया — ग्वालियर/उत्तर भारत
- होलकर — इंदौर
- गायकवाड़ — बड़ौदा
- भोंसले — नागपुर
- तृतीय पानीपत — 1761
- मराठा बनाम अहमद शाह दुर्रानी — पानीपत III
- तृतीय आंग्ल–मराठा युद्ध — 1817–1818
🏅 FINAL REVISION BOX — TOP 30 EXAM POINTS
1665 = पुरंदर → 1674 = राज्याभिषेक → 1761 = पानीपत III → 1818 = मराठा सत्ता का अंत
हो = इंदौर | गा = बड़ौदा | भो = नागपुर | सिं = ग्वालियर
📌 One-Page Mind Map
↓
स्वराज्य + दुर्ग + गतिशील युद्धनीति
↓
अष्टप्रधान + राजस्व व्यवस्था + नौसैनिक शक्ति
↓
1674 राज्याभिषेक
↓
संभाजी → राजाराम → ताराबाई
↓
शाहू के समय पेशवाओं का उदय
↓
बालाजी विश्वनाथ → बाजीराव प्रथम → बालाजी बाजीराव
↓
1761 तृतीय पानीपत
↓
माधवराव प्रथम द्वारा पुनरुत्थान
↓
सिंधिया + होलकर + गायकवाड़ + भोंसले
↓
आंग्ल–मराठा संघर्ष
↓
1817–1818 → मराठा राजनीतिक शक्ति का निर्णायक पतन