विधायी संशोधन तथा भारत सरकार अधिनियम, 1935
UPSSSC PET | भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन | Basic से Advanced Complete Notes
ब्रिटिश शासन के दौरान हुए संवैधानिक एवं विधायी सुधार भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन को समझने की कुंजी हैं। विशेष रूप से 1909, 1919 और 1935 के अधिनियमों की तुलना से परीक्षा में तथ्यात्मक, मिलान आधारित, कथन आधारित तथा क्रम आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
📋 Table of Contents
1️⃣ Chapter Introduction
विधायी संशोधन क्या थे?
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के प्रशासन, विधायिकाओं, निर्वाचन व्यवस्था और प्रांतीय शासन में समय-समय पर परिवर्तन किए गए। इन परिवर्तनों को समझने के लिए विभिन्न Constitutional / Legislative Reforms का अध्ययन किया जाता है।
इस अध्याय के मुख्य भाग
- भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 — Morley-Minto Reforms
- भारत सरकार अधिनियम, 1919 — Montagu-Chelmsford Reforms
- भारत सरकार अधिनियम, 1935
- तीनों अधिनियमों की तुलना
- भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन पर इनका प्रभाव
2️⃣ संवैधानिक विकास की पृष्ठभूमि
ब्रिटिश शासन में भारतीय प्रशासन से संबंधित कई महत्वपूर्ण कानून बनाए गए। राष्ट्रीय आन्दोलन के विकास के साथ भारतीयों की राजनीतिक भागीदारी की मांग बढ़ती गई।
Indian Councils Act — विधायी परिषदों में सीमित भारतीय भागीदारी का विस्तार।
विधायी परिषदों का विस्तार तथा बजट पर चर्चा जैसे सीमित अधिकारों में वृद्धि।
Morley-Minto Reforms — पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था सहित महत्वपूर्ण परिवर्तन।
Montagu-Chelmsford Reforms — प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy)।
Government of India Act — प्रांतीय स्वायत्तता सहित व्यापक संवैधानिक व्यवस्था।
1919 → प्रांतों में द्वैध शासन
1935 → प्रांतीय स्वायत्तता
3️⃣ भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 — Morley-Minto Reforms
Basic Concept
भारतीय परिषद अधिनियम 1909 को सामान्यतः Morley-Minto Reforms कहा जाता है। इसका नाम तत्कालीन Secretary of State for India John Morley और Viceroy Lord Minto से जुड़ा है।
मुख्य विशेषताएं
- केंद्रीय और प्रांतीय विधायी परिषदों का विस्तार किया गया।
- विधायी परिषदों में भारतीय प्रतिनिधित्व बढ़ाया गया।
- मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था की गई।
- सदस्यों को प्रश्न पूछने तथा कुछ मामलों में चर्चा करने के अवसर बढ़े।
- केंद्र में पहली बार एक भारतीय को Viceroy's Executive Council में शामिल किया गया।
1909 को कैसे याद रखें?
1909 = M-M = Morley-Minto = Muslim Separate Electorate
4️⃣ भारत सरकार अधिनियम, 1919 — Montagu-Chelmsford Reforms
परिचय
भारत सरकार अधिनियम 1919 को सामान्यतः Montagu-Chelmsford Reforms कहा जाता है। इसका संबंध Edwin Montagu और Lord Chelmsford से था।
द्वैध शासन क्या था?
Dyarchy का अर्थ है — शासन के विषयों को दो भागों में बांटना।
| भाग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| Reserved Subjects | इन पर Governor और उसके Executive Councillors का नियंत्रण | पुलिस, न्याय, भूमि राजस्व आदि |
| Transferred Subjects | भारतीय मंत्रियों को सौंपे गए विषय | शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य आदि |
1919 = Province + Dyarchy
यानी 1919 को देखते ही "प्रांतों में द्वैध शासन" याद करें।
1919 अधिनियम की अन्य प्रमुख विशेषताएं
- केंद्र में द्विसदनीय विधायिका की व्यवस्था की गई।
- केंद्रीय स्तर पर Legislative Assembly और Council of State की व्यवस्था हुई।
- प्रांतीय विधानमंडलों का विस्तार किया गया।
- प्रत्यक्ष निर्वाचन के तत्वों का विस्तार हुआ।
- सामुदायिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था का विस्तार किया गया।
- प्रांतों में Dyarchy लागू की गई।
- केंद्र में उत्तरदायी शासन अभी भी स्थापित नहीं हुआ।
1919 की सीमा
5️⃣ भारत सरकार अधिनियम, 1935
परिचय
Government of India Act, 1935 ब्रिटिश संसद द्वारा पारित भारत के संवैधानिक इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण अधिनियम था। यह 1935 में पारित हुआ और इसकी प्रांतीय व्यवस्था 1937 से प्रभावी हुई।
भारत सरकार अधिनियम 1935 की प्रमुख विशेषताएं
1. अखिल भारतीय संघ की योजना
अधिनियम में एक Federation of India की परिकल्पना की गई थी, जिसमें ब्रिटिश भारतीय प्रांत तथा देशी रियासतें शामिल हो सकती थीं।
2. प्रांतीय स्वायत्तता
1919 में प्रांतों में लागू Dyarchy को समाप्त करके प्रांतीय स्तर पर स्वायत्त शासन की व्यवस्था की गई।
1919 → Provincial Dyarchy
1935 → Provincial Autonomy
3. केंद्र में द्वैध शासन की योजना
1935 के अधिनियम ने केंद्र में भी Dyarchy की व्यवस्था की परिकल्पना की थी, लेकिन संघीय भाग लागू न होने के कारण यह व्यवस्था व्यवहार में लागू नहीं हुई।
4. द्विसदनीय संघीय विधायिका की योजना
संघीय स्तर पर दो सदनों वाली विधायिका का प्रावधान किया गया था।
5. प्रांतीय विधानमंडल
कुछ प्रांतों में द्विसदनीय विधानमंडल का प्रावधान था जबकि अन्य में एक सदनीय विधानमंडल रखा गया।
6. शक्तियों का विभाजन
संघ और प्रांतों के बीच विधायी शक्तियों को अलग-अलग सूचियों के माध्यम से बांटने की व्यवस्था की गई।
| सूची | सामान्य अर्थ |
|---|---|
| Federal List | संघीय स्तर के विषय |
| Provincial List | प्रांतीय स्तर के विषय |
| Concurrent List | केंद्र और प्रांत दोनों से संबंधित विषय |
7. संघीय न्यायालय
अधिनियम के अंतर्गत Federal Court की स्थापना का प्रावधान किया गया। इसका उद्देश्य संघीय विवादों और संवैधानिक प्रश्नों के न्यायिक निपटारे की व्यवस्था करना था।
8. मताधिकार का विस्तार
पहले की तुलना में मताधिकार का विस्तार किया गया, हालांकि यह सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार नहीं था।
9. पृथक निर्वाचक मंडल
सामुदायिक प्रतिनिधित्व और पृथक निर्वाचन की व्यवस्था को आगे भी बनाए रखा/विस्तारित किया गया।
10. Governor और Governor-General की शक्तियां
Governors और Governor-General को महत्वपूर्ण विशेष शक्तियां तथा विवेकाधीन/आपातकालीन शक्तियां प्राप्त थीं।
11. प्रांतों की संरचना में परिवर्तन
1935 के अधिनियम के तहत Sind को Bombay से अलग कर अलग प्रांत बनाया गया और Orissa को अलग प्रांत के रूप में गठित किया गया।
12. Burma का अलग होना
अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार Burma को भारत से अलग किया गया।
1935 अधिनियम — परीक्षा के लिए Core Facts
1935 अधिनियम की सीमाएं
- पूर्ण स्वशासन नहीं दिया गया।
- Governor-General के पास महत्वपूर्ण शक्तियां बनी रहीं।
- Governors को विशेष शक्तियां प्राप्त थीं।
- केंद्र में प्रस्तावित Federation लागू नहीं हो पाया।
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार नहीं था।
- ब्रिटिश नियंत्रण पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
1935 = पूर्ण उत्तरदायी केंद्रीय शासन नहीं।
1935 = प्रस्तावित Federation का वास्तविक क्रियान्वयन नहीं हुआ।
6️⃣ 1909, 1919 और 1935 — महत्वपूर्ण तुलना
| आधार | 1909 | 1919 | 1935 |
|---|---|---|---|
| लोकप्रिय नाम | Morley-Minto Reforms | Montagu-Chelmsford Reforms | Government of India Act |
| मुख्य विशेषता | Separate Electorates | Provincial Dyarchy | Provincial Autonomy |
| केंद्र | सीमित प्रतिनिधित्व | द्विसदनीय विधायिका | संघीय व्यवस्था की योजना |
| प्रांत | परिषदों का विस्तार | Dyarchy | Autonomy |
| न्यायिक व्यवस्था | नया Federal Court नहीं | नया Federal Court नहीं | Federal Court का प्रावधान |
| मताधिकार | सीमित | विस्तार | और व्यापक, लेकिन सार्वभौमिक नहीं |
1909 = Separate Electorate → 1919 = Dyarchy → 1935 = Provincial Autonomy
एक नजर में संवैधानिक विकास
प्रतिनिधित्व बढ़ा + मुस्लिम Separate Electorate
प्रांतों में Dyarchy + केंद्र में द्विसदनीयता
Provincial Autonomy + Federation की योजना + Federal Court
7️⃣ भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन पर प्रभाव
कांग्रेस का दृष्टिकोण
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश संवैधानिक सुधारों को सामान्यतः अपर्याप्त माना क्योंकि इनमें वास्तविक सत्ता भारतीय जनता को पूर्ण रूप से नहीं दी गई थी।
फिर भी 1935 के अधिनियम के अंतर्गत हुए चुनावों में कांग्रेस ने भाग लिया और 1937 में कई प्रांतों में कांग्रेस मंत्रिमंडल बने।
राष्ट्रीय आन्दोलन के संदर्भ में महत्व
- भारतीयों की प्रशासनिक भागीदारी बढ़ी।
- प्रांतीय राजनीति को अधिक महत्व मिला।
- भारतीय नेताओं को शासन चलाने का व्यावहारिक अनुभव मिला।
- केंद्र और प्रांतों के बीच शक्तियों के विभाजन की चर्चा मजबूत हुई।
- आगे के संवैधानिक विकास के लिए आधार तैयार हुआ।
⚡ Important Definitions
1. Separate Electorate
ऐसी निर्वाचन व्यवस्था जिसमें किसी विशेष समुदाय के मतदाता उसी समुदाय के प्रतिनिधि के चुनाव में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
2. Dyarchy
शासन के विषयों को दो भागों में विभाजित करके अलग-अलग प्राधिकरणों के नियंत्रण में रखना।
3. Provincial Autonomy
प्रांतों को अपने निर्धारित विषयों पर अधिक स्वायत्त शासन और निर्वाचित मंत्रियों के माध्यम से प्रशासन चलाने की व्यवस्था।
4. Federation
ऐसी राजनीतिक व्यवस्था जिसमें विभिन्न इकाइयां एक संघीय ढांचे में शामिल होती हैं और शक्तियां संघ तथा इकाइयों के बीच बांटी जाती हैं।
🧠 Advanced Concepts & Exam Traps
Trap 1: Dyarchy कहाँ?
सही: 1935 में प्रांतों की Dyarchy समाप्त करके Provincial Autonomy लाई गई।
Trap 2: 1935 की Federation
सही: Federation की योजना थी, लेकिन वह लागू नहीं हो सकी।
Trap 3: 1909 और 1919 को न मिलाएं
1919 → Provincial Dyarchy
Trap 4: 1935 और Federal Court
🔥 PYQ / PYQ Pattern Based Questions
उत्तर देखें
1909 के Indian Councils Act को Morley-Minto Reforms कहा जाता है।
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भारत सरकार अधिनियम 1919 के तहत प्रांतों में Dyarchy लागू की गई।
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1935 में प्रांतों में Dyarchy समाप्त करके Provincial Autonomy की व्यवस्था की गई।
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1909 → Separate Electorate, 1919 → Dyarchy, 1935 → Provincial Autonomy।
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1935 के अधिनियम में Federal Court की स्थापना का प्रावधान किया गया था।
🎯 Practice Questions
उत्तर देखें
1909 = Morley-Minto Reforms.
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1935 में प्रांतीय Dyarchy समाप्त करके Provincial Autonomy दी गई।
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Federal, Provincial और Concurrent Lists।
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1935 में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लागू नहीं हुआ था।
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कथन 2: 1935 के अधिनियम ने प्रांतों में Dyarchy समाप्त कर Provincial Autonomy प्रदान की। सही विकल्प चुनिए।
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प्रस्तावित Federation में British Indian Provinces तथा Indian States को शामिल करने की योजना थी।
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1. Provincial Autonomy का प्रावधान था।
2. Federal Court का प्रावधान था।
3. Universal Adult Franchise लागू किया गया।
सही विकल्प चुनिए।
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1935 में Provincial Autonomy और Federal Court का प्रावधान था, लेकिन Universal Adult Franchise नहीं था।
### Answer Key
📝 Solved Concept Questions
Question: 1919 और 1935 के बीच मुख्य अंतर क्या था?
1919 के अधिनियम में प्रांतों में Dyarchy लागू की गई थी, जबकि 1935 के अधिनियम में प्रांतों से Dyarchy हटाकर Provincial Autonomy की व्यवस्था की गई।
"1919 = Divide the Provincial Subjects"
"1935 = Province Gets Autonomy"
Question: 1935 अधिनियम को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
क्योंकि इसने संघीय ढांचे, शक्तियों के विभाजन, प्रांतीय स्वायत्तता, Federal Court तथा विधायी संस्थाओं से संबंधित व्यापक संवैधानिक व्यवस्था प्रस्तुत की।
⚠️ Common Mistakes
| ❌ गलत समझ | ✅ सही तथ्य |
|---|---|
| 1909 में Provincial Dyarchy | 1919 में Provincial Dyarchy |
| 1935 में Provincial Dyarchy जारी रही | 1935 में Provincial Dyarchy समाप्त हुई |
| 1935 Federation लागू हो गया | Federation प्रस्तावित था, लागू नहीं हुआ |
| 1935 में Universal Adult Franchise | मताधिकार बढ़ा, लेकिन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार नहीं |
| 1909 = Montagu-Chelmsford | 1909 = Morley-Minto |
| 1919 = Morley-Minto | 1919 = Montagu-Chelmsford |
🏆 Exam Strategy
सबसे पहले क्या याद करें?
Priority 2: 1919 = Dyarchy
Priority 3: 1935 = Provincial Autonomy
Priority 4: 1935 = Federal Court
Priority 5: 1935 = Federation की योजना
Option Elimination Trick
यदि किसी प्रश्न में 1909 के साथ "Provincial Autonomy" दिया हो तो उसे तुरंत गलत मानें। इसी तरह 1935 के साथ "प्रांतों में Dyarchy की शुरुआत" दिया हो तो वह गलत है।
Revision Method
- पहली बार — पूरी कहानी समझें।
- दूसरी बार — 1909/1919/1935 की तुलना पढ़ें।
- तीसरी बार — केवल Exam Points पढ़ें।
- अंत में Practice Questions हल करें।
⚡ Quick Revision
1909 → Morley-Minto → Separate Electorate
1919 → Montagu-Chelmsford → Provincial Dyarchy
1919 → Central Bicameral Legislature
1935 → Government of India Act
1935 → Provincial Autonomy
1935 → Provinces में Dyarchy समाप्त
1935 → Centre में Dyarchy की योजना
1935 → Federation of India की योजना
1935 → Federal Court
1935 → तीन Legislative Lists
1935 → मताधिकार का विस्तार
1935 → Governors की विशेष शक्तियां
1935 → Sind अलग प्रांत
1935 → Orissa अलग प्रांत
1935 → Burma का भारत से अलग होना
1937 → Provincial Autonomy की व्यवस्था के तहत चुनाव/मंत्रिमंडलीय शासन का चरण
🧠 सबसे महत्वपूर्ण Memory Chain
1919 → प्रांतों में दोहरा शासन
1935 → प्रांतों को अधिक स्वायत्तता
🏅 FINAL REVISION BOX — TOP EXAM POINTS
“1909 ने निर्वाचन व्यवस्था बदली, 1919 ने प्रांतों में द्वैध शासन दिया और 1935 ने प्रांतीय स्वायत्तता तथा संघीय व्यवस्था की व्यापक योजना प्रस्तुत की।”