भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन: स्वदेशी तथा सविनय अवज्ञा आंदोलन - UPSSSC PET Complete Notes
Target: UPSSSC PET Exam Level
1. Zero Explanation (शून्य से शुरुआत)
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वदेशी आंदोलन (1905) और सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) जन-आंदोलनों के मील के पत्थर हैं। जब ब्रिटिश सरकार ने भारतीय जनता के हितों की उपेक्षा की और दमनकारी नीतियां अपनाईं, तब महात्मा गांधी और अन्य महान राष्ट्रीय नेताओं के नेतृत्व में जनता ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ असहयोग और कानूनों के उल्लंघन का रास्ता अपनाया। स्वदेशी आंदोलन ने जहां आर्थिक आत्मनिर्भरता और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार पर जोर दिया, वहीं सविनय अवज्ञा आंदोलन ने ब्रिटिश नमक कानून को तोड़कर देशव्यापी सत्याग्रह का नया आयाम स्थापित किया।
- स्वदेशी (Swadeshi): अपने देश में बनी वस्तुओं का उपयोग करना और विदेशी वस्तुओं का पूर्ण बहिष्कार करना।
- सविनय अवज्ञा (Civil Disobedience): सरकार के अन्यायपूर्ण कानूनों का अहिंसक और सविनय ढंग से उल्लंघन करना।
- दांडी मार्च (Dandi March): गांधीजी द्वारा नमक कानून तोड़ने के लिए साबरमती से दांडी तक की गई ऐतिहासिक पैदल यात्रा।
2. Basic Concepts (बुनियादी अवधारणाएं)
इन दोनों आंदोलनों से जुड़ी बुनियादी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और चरण निम्नलिखित हैं:
- स्वदेशी आंदोलन की पृष्ठभूमि: 1905 में बंगाल के विभाजन के निर्णय के विरोध में यह आंदोलन शुरू हुआ। इसमें विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा दिया गया।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन की पृष्ठभूमि: 1930 में पूर्ण स्वराज की मांग (लाहौर अधिवेशन 1929) के बाद गांधीजी ने वायसराय इरविन के सामने 11 सूत्रीय मांगें रखीं, जिनके अस्वीकार होने पर सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ।
- गांधी-इरविन समझौता (1931): सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान हुए इस समझौते के बाद कांग्रेस ने गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया।
3. Intermediate Concepts (मध्यवर्ती अवधारणाएं)
स्वदेशी आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन का तुलनात्मक विवरण:
| आंदोलन का नाम | प्रारंभ वर्ष | प्रमुख नेता | मुख्य विशेषता / क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| स्वदेशी आंदोलन | 1905 | सुरेंद्रनाथ बनर्जी, बालगंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल | बंगाल विभाजन के विरोध में, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, स्वदेशी शिक्षा और उद्योगों का प्रसार। |
| सविनय अवज्ञा आंदोलन | 1930 | महात्मा गांधी, खान अब्दुल गफ्फार खान, सरोजिनी नायडू | नमक सत्याग्रह (दांडी मार्च), कर अदायगी से मना करना, महिलाओं की भारी भागीदारी। |
4. Advanced Concepts (उन्नत अवधारणाएं)
सविनय अवज्ञा आंदोलन केवल नमक कानून तोड़ने तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इसके क्षेत्रीय रूप सामने आए। उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान (सीमा गांधी) के नेतृत्व में 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती दल) ने आंदोलन चलाया। दक्षिण में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने तिरुचिरापल्ली से वेदारण्यम तक नमक मार्च निकाला। असम में छात्र आंदोलन हुए और नागालैंड में रानी गाइदिनल्यू ने नेतृत्व किया। इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें महिलाओं, व्यापारियों और किसानों ने अभूतपूर्व संख्या में भाग लिया, जिससे ब्रिटिश हुकूमत की आर्थिक नींव हिल गई।
5. Confusion Clear (भ्रम निवारण स्थल)
स्पष्टीकरण:
- असहयोग आंदोलन: इसमें सरकारी संस्थाओं, उपाधियों, स्कूलों और अदालतों का बहिष्कार शामिल था, लेकिन कानूनों का प्रत्यक्ष उल्लंघन नहीं था।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन: इसमें असहयोग के साथ-साथ सरकार के कानूनों (जैसे नमक कानून, कर कानून) को सविनय रूप से तोडना अनिवार्य रूप से शामिल था।
6. Cause -> Event -> Result (कारण, घटना और परिणाम)
- Cause (कारण): ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियां, साइमन कमीशन का विरोध, और पूर्ण स्वराज की मांग की उपेक्षा।
- Event (घटना): 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी मार्च की शुरुआत और 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा का शंखनाद।
- Result (परिणाम): गांधी-इरविन समझौता, गोलमेज सम्मेलनों में कांग्रेस की भागीदारी, और राष्ट्रीय आंदोलन का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रसार।
7. UPSSSC PET Exam Focus (परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु)
- दांडी मार्च अवधि: 12 मार्च 1930 से 6 अप्रैल 1930 तक (24 दिन की पैदल यात्रा, 78 अनुयायियों के साथ)।
- सीमांत गांधी: खान अब्दुल गफ्फार खान को 'बास्चा खान' या 'सीमांत गांधी' कहा जाता है।
- धरसाना सत्याग्रह: गांधीजी की गिरफ्तारी के बाद सरोजिनी नायडू और इमाम साहब के नेतृत्व में धरसाना नमक गोदाम पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया।
- स्वदेशी आंदोलन की तिथि: 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन का औपचारिक प्रस्ताव पास हुआ था।
8. One-Liner Revision (वन-लाइनर रिवीजन)
- सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय भारत का वाइसराय लॉर्ड इरविन था।
- दांडी मार्च में कुल 78 सत्याग्रही महात्मा गांधी के साथ शामिल थे।
- स्वदेशी आंदोलन के दौरान रबीन्द्रनाथ ठाकुर ने 'आमार सोनार बांग्ला' गीत लिखा जो बाद में बांग्लादेश का राष्ट्रगान बना।
- प्रथम गोलमेज सम्मेलन 1930 में लंदन में आयोजित हुआ था जिसमें कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था।
9. Rapid Revision Notes (रैपिड रिवीजन)
1905 का स्वदेशी आंदोलन बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुआ जिसमें आत्मनिर्भरता और बहिष्कार पर जोर दिया गया। 1930 का सविनय अवज्ञा आंदोलन महात्मा गांधी के दांडी मार्च से शुरू हुआ। इसमें नमक कानून तोड़ा गया, विदेशी कपड़ों का बहिष्कार हुआ और कर देने से मना किया गया। इसमें खान अब्दुल गफ्फार खान और सरोजिनी नायडू जैसे नेताओं ने अहम भूमिका निभाई।
10. Last Minute Revision (अंतिम समय का रिवीजन)
स्वदेशी आंदोलन (1905), बंगाल विभाजन, सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930), दांडी मार्च (12 मार्च - 6 अप्रैल 1930), 78 सत्याग्रही, गांधी-इरविन समझौता (1931), खान अब्दुल गफ्फार खान।
11. Chapter Summary (अध्याय सारांश)
इस अध्याय में हमने स्वदेशी आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन की पृष्ठभूमि, महात्मा गांधी तथा अन्य प्रमुख नेताओं की भूमिका, महत्वपूर्ण तिथियों और परीक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण तथ्यों का विस्तार से अध्ययन किया है जो UPSSSC PET परीक्षा के लिए अनिवार्य है।
12. Chapter Revision Checklist (रिवीजन चेकलिस्ट)
- Swadeshi Movement Background & Impact (स्वदेशी आंदोलन)
- Civil Disobedience Movement & Dandi March (सविनय अवज्ञा आंदोलन)
- Role of Mahatma Gandhi & Other Leaders (गांधीजी व अन्य नेताओं की भूमिका)
- Gandhi-Irwin Pact & Round Table Conferences (गांधी-इरविन समझौता)
- Exam Points & One-Liners (परीक्षा बिंदु)
13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. स्वदेशी आंदोलन किस वर्ष शुरू हुआ था?
उत्तर: वर्ष 1905 में (बंगाल विभाजन के विरोध में)।
Q2. सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत किस ऐतिहासिक घटना से हुई थी?
उत्तर: दांडी मार्च (नमक कानून तोड़कर)।
Q3. दांडी मार्च कब से कब तक चलाया गया था?
उत्तर: 12 मार्च 1930 से 6 अप्रैल 1930 तक।
Q4. दांडी यात्रा में महात्मा गांधी के साथ कितने सत्याग्रही शामिल थे?
उत्तर: 78 सत्याग्रही।
Q5. 'सीमांत गांधी' (Frontier Gandhi) किसे कहा जाता है?
उत्तर: खान अब्दुल गफ्फार खान को।
Q6. गांधी-इरविन समझौता किस वर्ष हुआ था?
उत्तर: वर्ष 1931 में (5 मार्च 1931)।
Q7. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान तमिलनाडु में वेदारण्यम मार्च का नेतृत्व किसने किया था?
उत्तर: सी. राजगोपालाचारी ने।
Q8. सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय भारत का गवर्नर-जनरल / वाइसराय कौन था?
उत्तर: लॉर्ड इरविन।